
नमस्कार साथियों बोर्ड एग्जाम वर्ल्ड में आपका स्वागत है।साथियों इस पोस्ट में हम कार्बन एवम् उसके यौगिक के बारे में पढ़ेंगे।जो आपके syllabus के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
- 4.1 सहसंयोजी आबंध
- कार्बन के अपरूप (हीरा, ग्रेफाइट, फुलेरीन)
- 4.2 कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति
- 4.2.1 संतृप्त एवं असंतृप्त यौगिक
- 4.2.2 श्रृंखला, शाखा एवं वलय + सारणी 4.2
- 4.2.3 प्रकार्यात्मक समूह (सारणी 4.3)
- 4.2.4 समजातीय श्रेणी
- 4.2.5 नामपद्धति (सारणी 4.4)
- 4.3 रासायनिक गुणधर्म
- 4.4 एथेनॉल एवं एथेनॉइक अम्ल
- 4.5 साबुन और अपमार्जक
- 📜 PYQ 2015–2024 उत्तर सहित
कार्बन की परमाणु संख्या 6 है। बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। अष्टक पूरा करने के लिए 4 और चाहिए। इसीलिए कार्बन दूसरे परमाणुओं के साथ 4 सहसंयोजी आबंध बनाता है।
सारणी 4.1 — कुछ कार्बन यौगिकों के गलनांक व क्वथनांक
| यौगिक | गलनांक (K) | क्वथनांक (K) |
|---|---|---|
| एसीटिक एसिड (CH₃COOH) | 290 | 391 |
| क्लोरोफॉर्म (CHCl₃) | 209 | 334 |
| एथेनॉल (C₂H₅OH) | 156 | 351 |
| मेथेन (CH₄) | 90 | 111 |
हीरा (Diamond)
हर C → 4 अन्य C से जुड़ा
दृढ़ त्रिआयामी संरचना
अत्यंत कठोर
विद्युत कुचालक
ग्रेफाइट (Graphite)
हर C → 3 अन्य से जुड़ा
षट्कोणीय परतें
नरम + चिकना
विद्युत सुचालक
फुलेरीन (C-60)
60 कार्बन परमाणु
फुटबॉल जैसी संरचना
बकमिनस्टरफुलेरीन
नया अपरूप
कार्बन इतने सारे यौगिक क्यों बनाता है? इसके दो मुख्य कारण हैं —
- श्रृंखलन (Catenation): कार्बन अपने ही परमाणुओं के साथ आबंध बनाकर लंबी श्रृंखला, शाखा या वलय बनाता है। यह गुण किसी और तत्व में इतना नहीं होता।
- चतुःसंयोजकता: कार्बन की संयोजकता 4 होती है। यह H, O, N, S, Cl के साथ यौगिक बनाता है। ये आबंध बहुत प्रबल होते हैं।
| संतृप्त | असंतृप्त |
|---|---|
| एकल आबंध (C–C) | द्वि/त्रिआबंध (C=C, C≡C) |
| कम अभिक्रियाशील | अधिक अभिक्रियाशील |
| स्वच्छ नीली ज्वाला | काले धुएँ वाली पीली ज्वाला |
| प्रतिस्थापन अभिक्रिया | संकलन अभिक्रिया |
| उदाहरण: मेथेन, एथेन | उदाहरण: एथीन, एथाइन |
कार्बन परमाणु जुड़कर सीधी, शाखायुक्त और चक्रीय (वलय) संरचनाएँ बनाते हैं।
संरचनात्मक समावयव: एक ही आणविक सूत्र लेकिन भिन्न संरचनाएँ। जैसे C₄H₁₀ के दो रूप — n-ब्यूटेन (सीधी) और आइसो-ब्यूटेन (शाखित)।
सारणी 4.2 — एल्केन (संतृप्त) यौगिक
| कार्बन संख्या | नाम | सूत्र |
|---|---|---|
| 1 | मेथेन | CH₄ |
| 2 | एथेन | C₂H₆ |
| 3 | प्रोपेन | C₃H₈ |
| 4 | ब्यूटेन | C₄H₁₀ |
| 5 | पेन्टेन | C₅H₁₂ |
| 6 | हेक्सेन | C₆H₁₄ |
सारणी 4.3 — मुख्य प्रकार्यात्मक समूह
| विषय परमाणु | यौगिक का प्रकार | प्रकार्यात्मक समूह | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| Cl/Br | हैलो ऐल्केन | –Cl, –Br | क्लोरोमेथेन |
| ऑक्सीजन | 1. एल्कोहल | –OH | एथेनॉल |
| 2. ऐल्डिहाइड | –CHO | एथेनैल | |
| 3. कीटोन | –C=O– | प्रोपेनोन | |
| 4. कार्बोक्सिलिक अम्ल | –COOH | एथेनॉइक अम्ल |
- CH₄ और C₂H₆ में एक –CH₂– इकाई का अंतर
- एल्कीन का सामान्य सूत्र: CₙH₂ₙ (n = 2, 3, 4…)
- एल्काइन का सामान्य सूत्र: CₙH₂ₙ₋₂
- आणविक द्रव्यमान बढ़ने पर गलनांक-क्वथनांक में क्रमबद्धता
- रासायनिक गुण समजातीय श्रेणी में एकसमान रहते हैं
- यौगिक में कार्बन परमाणुओं की संख्या ज्ञात करें (3 C = प्रोपेन)
- प्रकार्यात्मक समूह के अनुसार पूर्वलग्म या अनुलग्म जोड़ें
- अनुलग्म स्वर से शुरू हो तो अंत का ‘e’ हटाएँ: propan + one = propanone
- असंतृप्त श्रृंखला में ‘ane’ → ‘ene’ या ‘yne’ से बदलें
सारणी 4.4 — नामपद्धति
| यौगिक प्रकार | पूर्वलग्म/अनुलग्म | उदाहरण |
|---|---|---|
| हैलो ऐल्केन | क्लोरो, ब्रोमो (पूर्व) | क्लोरोप्रोपेन, ब्रोमोप्रोपेन |
| एल्कोहल | -ol (अनु) | प्रोपेनॉल |
| ऐल्डिहाइड | -al (अनु) | प्रोपेनैल |
| कीटोन | -one (अनु) | प्रोपेनोन |
| कार्बोक्सिलिक अम्ल | -oic acid (अनु) | प्रोपेनॉइक अम्ल |
| एल्कीन | -ene (अनु) | प्रोपीन |
| एल्काइन | -yne (अनु) | प्रोपाइन |
सभी कार्बन यौगिक ऑक्सीजन में जलकर CO₂ + H₂O + ऊष्मा + प्रकाश देते हैं।
- संतृप्त HC: स्वच्छ नीली ज्वाला (पूर्ण दहन)
- असंतृप्त HC: काले धुएँ वाली पीली ज्वाला (अपूर्ण दहन)
वनस्पति तेल (असंतृप्त) + H₂ → वनस्पति घी (संतृप्त) — यही हाइड्रोजनीकरण है।
संतृप्त HC में H का दूसरे परमाणु द्वारा प्रतिस्थापन।
- कक्ष ताप पर तरल, गलनांक 156K, क्वथनांक 351K
- सभी एल्कोहल पेय पदार्थों का घटक
- टिंचर आयोडीन, कफ सिरप, टॉनिक में उपयोग
- औद्योगिक में मेथेनॉल मिलाकर विकृत एल्कोहल बनाते हैं (पीने के लिए नहीं)
- गन्ने से किण्वन द्वारा बनाया जाता है — ईंधन के रूप में भी
- सामान्य नाम — एसीटिक अम्ल
- 3–4% विलयन = सिरका (Vinegar)
- गलनांक 290K — ठंड में जम जाता है → ग्लेशियल एसीटिक अम्ल
- खनिज अम्लों से दुर्बल लेकिन NaHCO₃ से CO₂ निकालता है
| साबुन | अपमार्जक |
|---|---|
| कार्बोक्सिलिक अम्ल के Na/K लवण | सल्फोनिक/अमोनियम लवण |
| कठोर जल में अप्रभावी (स्कम बनाता है) | कठोर जल में भी प्रभावी |
| जैव अपघटनीय | कुछ जैव अपघटनीय नहीं |
| कम प्रदूषण | अधिक प्रदूषण संभव |
📌 आपने क्या सीखा
- कार्बन — सर्वतोमुखी तत्व, सभी जीवों का आधार
- सहसंयोजी आबंध — इलेक्ट्रॉन साझेदारी से बनता है
- कम गलनांक/क्वथनांक, विद्युत कुचालक — सहसंयोजी यौगिक की पहचान
- श्रृंखलन + चतुःसंयोजकता = सर्वतोमुखी प्रकृति
- संतृप्त (एकल आबंध) vs असंतृप्त (द्वि/त्रिआबंध)
- प्रकार्यात्मक समूह — यौगिक के रासायनिक गुण तय करते हैं
- एथेनॉल — एल्कोहल, एस्टरीकरण, निर्जलीकरण अभिक्रियाएँ
- एथेनॉइक अम्ल — एसीटिक अम्ल, कार्बोनेट से CO₂
- साबुन — मिसेल बनाकर सफाई करता है
- अपमार्जक — कठोर जल में भी काम करता है
CBSE Board Exam — Chapter 4: कार्बन एवं उसके यौगिक
(a) 5 (b) 6 (c) 7 (d) 8
(c) 7 — C–C = 1 आबंध + प्रत्येक C पर 3 H = 6 आबंध। कुल = 1 + 6 = 7।
(a) कार्बोक्सिलिक अम्ल (b) ऐल्डिहाइड (c) कीटोन (d) एल्कोहल
(c) कीटोन — ब्यूटेनॉन में –C=O– (कीटोन) प्रकार्यात्मक समूह है। IUPAC नाम: Butan-2-one।
(a) भोजन पूरी तरह नहीं पका (b) ईंधन पूरी तरह नहीं जल रहा (c) ईंधन आर्द्र है (d) ईंधन पूरी तरह जल रहा है
(b) ईंधन पूरी तरह नहीं जल रहा है — अपूर्ण दहन से काला कज्जल (कार्बन) जमा होता है। वायु की कमी से असंतृप्त यौगिक अपूर्ण रूप से जलते हैं।
(a) C₂H₂ (b) C₂H₄ (c) C₂H₆ (d) C₃H₄
(c) C₂H₆ (एथेन) — इसमें C–C एकल आबंध है → संतृप्त। C₂H₂ (त्रिआबंध), C₂H₄ (द्विआबंध) असंतृप्त हैं।
(a) केवल जलरागी सिरा (b) केवल जलविरागी सिरा (c) दोनों सिरे (d) कोई नहीं
(c) जलरागी एवं जलविरागी दोनों सिरे — COO⁻Na⁺ = जलरागी; लंबी कार्बन श्रृंखला = जलविरागी। इसी से मिसेल बनता है।
सहसंयोजी आबंध: दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के एक युग्म की साझेदारी से बनता है।
H₂ में: H की परमाणु संख्या 1 — K कोश में 1 e⁻। K कोश भरने के लिए 1 और चाहिए। दो H परमाणु एक-एक e⁻ की साझेदारी करते हैं → H–H बनता है।
गैस की पहचान: उत्पन्न गैस हाइड्रोजन (H₂) है। जलती तीली लाने पर “पॉप” की आवाज के साथ जलती है।
समजातीय श्रेणी: एक ही प्रकार का प्रकार्यात्मक समूह + –CH₂– का अंतर + सामान्य सूत्र।
| क्रम | नाम | सूत्र |
|---|---|---|
| 1 | मेथेनॉल | CH₃OH |
| 2 | एथेनॉल | C₂H₅OH |
| 3 | प्रोपेनॉल | C₃H₇OH |
ऑक्सीकारक: वे पदार्थ जो दूसरों को ऑक्सीजन देते हैं। जैसे — क्षारीय KMnO₄ और K₂Cr₂O₇।
(एथेनॉल) (एथेनॉइक अम्ल)
हाइड्रोजनीकरण: असंतृप्त HC में Ni उत्प्रेरक की उपस्थिति में H₂ जोड़ना।
औद्योगिक उपयोग: वनस्पति तेल → वनस्पति घी।
| वनस्पति तेल | जंतु वसा |
|---|---|
| असंतृप्त श्रृंखला | संतृप्त श्रृंखला |
| तरल (कमरे के ताप पर) | ठोस |
| स्वास्थ्य के लिए बेहतर | हानिकारक हो सकता है |
| साबुन | अपमार्जक |
|---|---|
| RCOO⁻Na⁺ (कार्बोक्सिलेट) | RSO₃⁻Na⁺ (सल्फोनेट) |
| कठोर जल में अप्रभावी | कठोर जल में प्रभावी |
| जैव अपघटनीय | पर्यावरण को नुकसान |
कठोर जल में साबुन क्यों नहीं: Ca²⁺ और Mg²⁺ आयन साबुन से अभिक्रिया → अघुलनशील स्कम → झाग नहीं, सफाई नहीं।
सर्वतोमुखी प्रकृति के कारण:
- श्रृंखलन: कार्बन-कार्बन आबंध बहुत प्रबल। लंबी श्रृंखलाएँ, शाखाएँ, वलय — सब बना सकता है।
- चतुःसंयोजकता: H, O, N, S, Cl से यौगिक। इससे अनगिनत यौगिक संभव।
| संतृप्त | असंतृप्त |
|---|---|
| एकल आबंध (C–C) | द्वि/त्रिआबंध |
| कम अभिक्रियाशील | अधिक अभिक्रियाशील |
| नीली स्वच्छ ज्वाला | पीली, धुएँदार ज्वाला |
| प्रतिस्थापन अभिक्रिया | संकलन अभिक्रिया |
| मेथेन, एथेन (CₙH₂ₙ₊₂) | एथीन, एथाइन |
भौतिक गुण:
- गलनांक 290K — ठंड में जम जाता है → ग्लेशियल एसीटिक अम्ल
- क्वथनांक 391K | 3-4% विलयन = सिरका
- खनिज अम्लों से दुर्बल | कार्बोक्सिलिक अम्ल
1. दहन:
2. ऑक्सीकरण:
3. संकलन:
4. प्रतिस्थापन:
हीरा: हर C → 4 C से जुड़ा → दृढ़ 3D जालक → अत्यंत कठोर।
ग्रेफाइट: हर C → 3 C से जुड़ा → षट्कोणीय परतें → नरम।
| गुण | हीरा | ग्रेफाइट |
|---|---|---|
| कठोरता | सर्वाधिक कठोर | बहुत नरम |
| विद्युत | कुचालक | सुचालक |
| संरचना | 3D जालक | 2D परतें |
| उपयोग | आभूषण, ड्रिल | पेंसिल, इलेक्ट्रोड |
मिसेल: साबुन के अणुओं की गोलाकार संरचना। जलरागी सिरा बाहर (जल की ओर) + जलविरागी पूँछ अंदर (तेल की ओर)।
- साबुन के अणु का जलविरागी सिरा तेल-मैल की ओर आकर्षित होता है
- जलरागी सिरा जल की ओर रहता है → मिसेल बनता है
- मिसेल में तेल कण घिर जाते हैं → एमल्शन बनता है
- कपड़े धोने पर मिसेल मैल को पानी में बाहर ले आता है → कपड़ा साफ
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