Class 10 Hindi Chapter 2 Tulsidas Ram Lakshman Parshuram Samvad Notes 2026 | UP Board

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🏹 CHAPTER 2 • HINDI KSHITIJ • CLASS 10

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

तुलसीदास — सम्पूर्ण व्याख्या • भावार्थ • MCQ • Q&A • Board Exam 2026

📚 हिंदी क्षितिज 📖 Chapter 2 🎯 UP Board 2026 ✅ Board Exam Ready 📝 New NCERT

✍️ कवि परिचय — तुलसीदास

जन्म
1532 ई. (राजापुर, UP)
मृत्यु
1623 ई. (काशी)
गुरु
नरहरिदास
प्रमुख रचना
रामचरितमानस
भाषा
अवधी और ब्रजभाषा
भक्ति
राम भक्ति (सगुण)

तुलसीदास के बारे में महत्वपूर्ण बातें:

  • तुलसीदास को हिंदी साहित्य का सूर्य कहा जाता है।
  • इनकी प्रमुख रचना रामचरितमानस अवधी में लिखी गई।
  • इन्होंने विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली भी लिखी।
  • यह पाठ रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है।
  • इन्हें “भक्तिकाल का सर्वश्रेष्ठ कवि” माना जाता है।
📌 Board Exam Tip: तुलसीदास का जन्म, गुरु, प्रमुख रचना और भाषा जरूर याद करें।

📖 प्रसंग (Context)

यह प्रसंग रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है। सीता स्वयंवर में राम ने शिव धनुष तोड़ दिया। यह खबर सुनकर परशुराम बहुत क्रोधित होकर वहाँ आए।

परशुराम शिव के परम भक्त और क्षत्रिय विनाशक थे। धनुष टूटने से वे अत्यंत क्रोधित हुए। इस संवाद में राम की विनम्रता, लक्ष्मण का व्यंग्य और परशुराम का क्रोध दिखाया गया है।

💡 मुख्य पात्र: राम (शांत), लक्ष्मण (व्यंग्यकार), परशुराम (क्रोधी)

📜 परशुराम का क्रोध — पंक्तियाँ

📜 परशुराम की पंक्तियाँ — मूल पाठ
नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।।
आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।।
सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई।।
सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा।।
सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।।
सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने।।
बहु धनुही तोरी लरिकाई। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाई।।
येहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।।
रे नृपबालक कालबस बोलत तोहि न सँभारा।
धनुही सम त्रिपुरारिधनु बिदित सकल संसारा।।

कठिन शब्दों के अर्थ:

शब्दअर्थ
संभुधनुशिव का धनुष
भंजनिहारातोड़ने वाला
रिसाइक्रोध करके
कोहीक्रोधी
सहसबाहुसहस्रबाहु — परशुराम का शत्रु
बिलगाउअलग हो जाओ
मुसुकानेमुस्कुराए
अवमानेअपमान करते हुए
नृपबालकराजकुमार
कालबसकाल के वश में
त्रिपुरारिधनुशिव का धनुष

भावार्थ:

राम ने विनम्रता से कहा — “हे नाथ! शिव धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा।” परशुराम क्रोधित होकर बोले — “जो शत्रु का काम करे वह सेवक नहीं, शत्रु है।”

परशुराम ने कहा — “हे राम! जिसने शिव धनुष तोड़ा वह मेरा शत्रु है। वह सभा छोड़कर अलग हो जाए नहीं तो सब राजा मारे जाएंगे।”

यह सुनकर लक्ष्मण मुस्कुराए और परशुराम का अपमान करते हुए बोले — “हमने बचपन में बहुत धनुष तोड़े, तब आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया।”

परशुराम क्रोधित होकर बोले — “रे राजकुमार! तू काल के वश में बोल रहा है। यह साधारण धनुष नहीं — यह त्रिपुरारि (शिव) का धनुष है जो सारे संसार में प्रसिद्ध है।”

📌 Board Exam Tip: परशुराम के क्रोध का कारण और लक्ष्मण का व्यंग्य परीक्षा में पूछा जाता है।

📜 लक्ष्मण का व्यंग्य — पंक्तियाँ

📜 लक्ष्मण की पंक्तियाँ — मूल पाठ
लखन कहा हसि हमरे जाना। सुनहु देव सब धनुष समाना।।
का छति लाभु जून धनु तोरें। देखा राम नयन के भोरें।।
छुअत टूट रघुपतिहि न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू।।
बोले चितै परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा।।
बालकु बोलि बधौं नहि तोही। केवल मुनि जड़ जानहि मोही।।
बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही।।
भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही।।
सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा।।
माटु पितहि जिन सोचबस करिस महीसिकसोर।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर।।
बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी।।
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।
इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।।
देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।।
भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहौं रिस रोकी।।
सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरे कुल इन्ह पर न सुराई।।
बधें पापु अपकीरति हारें। मारतहू पा परिअ तुम्हारें।।
कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। व्यर्थ धरहु धनु बान कुठारा।।
जो बिलोकि अनुचित कहेउँ छमहु महामुनि धीर।
सुनि सरोष भृगुबंसमनि बोले गिरा गंभीर।।

कठिन शब्दों के अर्थ:

शब्दअर्थ
छतिहानि
जून धनुपुराना धनुष
भोरेंभूल से, अनजाने में
रोसूक्रोध
सठमूर्ख
कोहीक्रोधी
महिदेवन्हब्राह्मणों को
कुम्हड़बतियाकच्चा कद्दू
तरजनीअंगुली
कुठारूफरसा (परशुराम का हथियार)
जनेउयज्ञोपवीत
कुलिसवज्र

भावार्थ:

लक्ष्मण ने हँसते हुए कहा — “हमारे लिए तो सब धनुष एक समान हैं। इस पुराने धनुष के टूटने से क्या हानि हुई? यह तो राम की नजर पड़ते ही टूट गया — इसमें राम का क्या दोष?”

परशुराम क्रोधित होकर बोले — “रे मूर्ख! तू मेरा स्वभाव नहीं जानता। मैंने तुझे बालक समझकर नहीं मारा। मैं बाल ब्रह्मचारी और अत्यंत क्रोधी हूँ। मैंने पृथ्वी को क्षत्रियों से खाली करके ब्राह्मणों को दिया है।”

लक्ष्मण ने मुस्कुराते हुए नरम वाणी में कहा — “अहो! मुनि बड़े योद्धा हैं! बार-बार फरसा दिखाते हैं। क्या पहाड़ फूँककर उड़ाना चाहते हैं? यहाँ कोई कच्चा कद्दू नहीं जो अंगुली देखकर मर जाए।”

लक्ष्मण ने कहा — “आपका जनेउ देखकर मैं क्रोध रोक रहा हूँ। देवता, ब्राह्मण, भक्त और गाय — इन पर हमारे कुल में वीरता नहीं दिखाई जाती। आपके वचन करोड़ वज्रों के समान हैं।”

💡 लक्ष्मण का “कुम्हड़बतिया” और “फूँकि पहारू” वाला व्यंग्य परीक्षा में जरूर पूछा जाता है।
📌 Board Exam Tip: लक्ष्मण के व्यंग्य के 2-3 उदाहरण 5 नंबर के प्रश्न में आते हैं।

🎭 पात्रों का चरित्र चित्रण

पात्रस्वभावविशेषताएं
रामशांत और विनम्रधीरे-धीरे बोलते हैं, क्रोध नहीं करते
लक्ष्मणव्यंग्यकार और साहसीपरशुराम पर तीखे व्यंग्य करते हैं
परशुरामक्रोधी और अहंकारीअपनी शक्ति का बखान करते हैं

✨ काव्य की विशेषताएं

विशेषताविवरण
भाषाअवधी — मीठी और प्रवाहमान
छंददोहा और चौपाई
रसवीर रस और हास्य रस
अलंकारउपमा, अनुप्रास, व्यंग्योक्ति
शैलीसंवाद शैली — नाटकीय
स्रोतरामचरितमानस — बालकांड

🌸 महत्वपूर्ण अलंकार

पंक्तिअलंकारकारण
कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हाराउपमावचन की तुलना करोड़ वज्र से
चहत उड़ावन फूँकि पहारूव्यंग्योक्तिव्यंग्य में पहाड़ फूँकना
बाल ब्रह्मचारी अति कोहीअनुप्रास‘ब’ वर्ण की आवृत्ति
भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्हीअनुप्रास‘भ’ वर्ण की आवृत्ति
📌 Board Exam Tip: अनुप्रास और उपमा अलंकार परीक्षा में पूछे जाते हैं।

📝 Board Exam 2026 के महत्वपूर्ण Q&A

📝 2 अंक के प्रश्न

Q1. परशुराम के क्रोध का क्या कारण था?
उत्तर: परशुराम शिव के परम भक्त थे। जब उन्हें पता चला कि राम ने सीता स्वयंवर में शिव धनुष तोड़ दिया तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए। उनके लिए शिव धनुष का टूटना अपमान था। इसीलिए वे क्रोध में सभा में आए।
Q2. लक्ष्मण ने परशुराम पर क्या व्यंग्य किया?
उत्तर: लक्ष्मण ने कहा — “चहत उड़ावन फूँकि पहारू” — क्या पहाड़ को फूँककर उड़ाना चाहते हो? तथा “इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं जे तरजनी देखि मरि जाहीं” — यहाँ कोई कच्चा कद्दू नहीं जो अंगुली देखकर मर जाए।
Q3. राम का स्वभाव कैसा था?
उत्तर: राम का स्वभाव अत्यंत शांत और विनम्र था। परशुराम के क्रोध के सामने भी राम ने धैर्य रखा और विनम्रता से उत्तर दिया। वे कभी क्रोधित नहीं हुए। उन्होंने कहा — शिव धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा।

📝 5 अंक के प्रश्न

Q4. लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का भावार्थ लिखिए।
उत्तर: लक्ष्मण ने हँसते हुए कहा कि सब धनुष एक समान हैं। राम की नजर पड़ते ही टूट गया — इसमें राम का दोष नहीं।

परशुराम क्रोधित होकर बोले कि मैं बाल ब्रह्मचारी और क्रोधी हूँ। मैंने पृथ्वी को क्षत्रियों से खाली किया है।

लक्ष्मण ने व्यंग्य से कहा — “क्या पहाड़ फूँककर उड़ाना चाहते हो? यहाँ कोई कच्चा कद्दू नहीं।”

अंत में लक्ष्मण ने कहा — आपका जनेउ देखकर क्रोध रोक रहा हूँ। देवता और ब्राह्मण पर हमारे कुल में वीरता नहीं दिखाई जाती।
Q5. तुलसीदास का साहित्यिक परिचय दीजिए।
उत्तर: तुलसीदास हिंदी साहित्य के महान कवि थे।

जन्म: 1532 ई., राजापुर (उत्तर प्रदेश)
मृत्यु: 1623 ई., काशी
गुरु: नरहरिदास
प्रमुख रचनाएं: रामचरितमानस, विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली
भाषा: अवधी और ब्रजभाषा

तुलसीदास को भक्तिकाल का सर्वश्रेष्ठ कवि माना जाता है। रामचरितमानस विश्व प्रसिद्ध रचना है।

🎯 MCQ — Board Exam 2026

Q1. तुलसीदास का जन्म कब हुआ?

  • (a) 1478 ई.
  • (b) 1532 ई. ✅ सही उत्तर
  • (c) 1623 ई.
  • (d) 1398 ई.

Q2. राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद किस ग्रंथ से लिया गया है?

  • (a) सूरसागर
  • (b) विनय पत्रिका
  • (c) रामचरितमानस ✅ सही उत्तर
  • (d) कवितावली

Q3. परशुराम क्रोधित क्यों हुए?

  • (a) राम ने उनका अपमान किया
  • (b) शिव धनुष टूट गया ✅ सही उत्तर
  • (c) लक्ष्मण ने उन्हें मारा
  • (d) सीता का विवाह नहीं हुआ

Q4. “कुम्हड़बतिया” से लक्ष्मण का क्या अभिप्राय है?

  • (a) मजबूत व्यक्ति
  • (b) कमजोर व्यक्ति जो डर जाए ✅ सही उत्तर
  • (c) कद्दू की सब्जी
  • (d) परशुराम का हथियार

Q5. तुलसीदास की भाषा कौन सी थी?

  • (a) केवल ब्रजभाषा
  • (b) केवल संस्कृत
  • (c) अवधी और ब्रजभाषा ✅ सही उत्तर
  • (d) खड़ीबोली

Q6. “भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही” में कौन सा अलंकार है?

  • (a) उपमा
  • (b) रूपक
  • (c) अनुप्रास ✅ सही उत्तर
  • (d) यमक

🎯 Board Exam 2026 — यह जरूर याद करें!

  • तुलसीदास जन्म = 1532 ई. | गुरु = नरहरिदास
  • प्रमुख रचना = रामचरितमानस | भाषा = अवधी
  • यह पाठ = बालकांड से लिया गया
  • राम = शांत | लक्ष्मण = व्यंग्यकार | परशुराम = क्रोधी
  • कुम्हड़बतिया = कमजोर व्यक्ति (व्यंग्य)
  • फूँकि पहारू = व्यर्थ प्रयास (व्यंग्य)
  • भुजबल भूमि भूप = अनुप्रास अलंकार
  • इस Chapter से 10-12 नंबर के प्रश्न आते हैं

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