नौबतखाने में इबादत Class 10 Hindi Notes 2026 | बिस्मिल्ला खाँ UP Board

नौबतखाने में इबादत class 10 hindi यतीन्द्र मिश्र नोट्स Emaige

🎵 UP Board Exam 2026 — यह पाठ जरूर पढ़ें!

नौबतखाने में इबादत से 10-12 नंबर के प्रश्न आते हैं। बिस्मिल्ला खाँ का जीवन और शहनाई की विशेषताएं याद करो! 🎯

📖 CHAPTER 11 • HINDI KSHITIJ • CLASS 10

यतींद्र मिश्र — नौबतखाने में इबादत

Naubatkhane Mein Ibadat — पूरी कहानी • बिस्मिल्ला खाँ • शहनाई • MCQ • Board Exam 2026

📚 हिंदी क्षितिज 📖 Chapter 11 🎯 UP Board 2026 ✅ Board Exam Ready

दोस्तों, Class 10 Hindi Chapter 11 यतींद्र मिश्र का पाठ नौबतखाने में इबादत शहनाई के महान उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की जीवनगाथा है। यह पाठ संगीत, आस्था, काशी और एक महान कलाकार की जिंदगी की कहानी है। आइए पूरे पाठ को आसान भाषा में समझते हैं।


✍️ लेखक परिचय — यतींद्र मिश्र

जानकारीविवरण
जन्म1977 ई. (अयोध्या, उत्तर प्रदेश)
विधाकविता, गद्य, संगीत लेखन
प्रमुख रचनायदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएं
विशेषतासंगीत और कला पर लेखन

🎵 बिस्मिल्ला खाँ — परिचय

जानकारीविवरण
असली नामअमीरुद्दीन
जन्मडुमराँव, बिहार
उम्र (पाठ में)14 साल (बचपन में)
उस्तादपैगंबरबख्श खाँ और मिट्ठन के छोटे साहबजादे
परदादाउस्ताद सलार हुसैन खाँ
पुरस्कारभारतरत्न
वाद्य यंत्रशहनाई
📌 Board Exam Tip: बिस्मिल्ला खाँ का असली नाम, जन्म स्थान और पुरस्कार जरूर याद करें।

🎺 शहनाई क्या है?

शहनाई एक सुषिर-वाद्य है। यानी फूँककर बजाए जाने वाला वाद्य। इसमें नाड़ी (नरकट या रीड) होती है जिसे “नय” बोलते हैं। शहनाई को “शाहेनय” यानी “सुषिर वाद्यों में शाह” की उपाधि दी गई है।

🎺 शहनाई की विशेषताएं

• रीड (नरकट) से बनती है जो डुमराँव में सोन नदी के किनारे पाई जाती है।
• रीड अंदर से पोली होती है जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है।
• वैदिक काल से इसका उल्लेख मिलता है।
• मांगलिक अवसरों पर बजाई जाती है।
• दक्षिण भारत के “नागस्वरम्” की तरह शहनाई प्रभाती की मंगलध्वनि है।
• सोलहवीं शताब्दी में तानसेन ने बंदिश में शहनाई का उल्लेख किया।

📌 Board Exam Tip: शहनाई को “शाहेनय” क्यों कहते हैं — यह परीक्षा में पूछा जाता है।

📖 पूरी कहानी — शुरू से अंत तक

दोस्तों, अब पूरे पाठ को आसान भाषा में पढ़ो। इससे सभी सवालों के जवाब खुद आ जाएंगे।

🕌 भाग 1 — काशी का बालाजी मंदिर

सन् 1916-22 के आसपास की काशी। पंचगंगा घाट स्थित बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी। ड्योढ़ी का नौबतखाना और नौबतखाने से निकलने वाली मंगलध्वनि।

अमीरुद्दीन अभी सिर्फ 6 साल का है और बड़ा भाई शम्सुद्दीन 9 साल का। अमीरुद्दीन को राग क्या चिड़िया होती है — यह पता नहीं। लेकिन उनके मामाजान सादिक हुसैन और अलीबख्श देश के जाने-माने शहनाई वादक हैं।

📍 बालाजी मंदिर
बालाजी मंदिर का नाम रोजनामचे में सबसे ऊपर आता है।
हर दिन की शुरुआत वहीं ड्योढ़ी पर होती है।
मंदिर के विग्रहों को रोज बदल-बदलकर मुलतानी, कल्याण, ललित और भैरव रागों को सुनाया जाता है।
अलीबख्श के घर का खानदानी पेशा है — इसी ड्योढ़ी पर शहनाई बजाना।

🏠 भाग 2 — डुमराँव और शहनाई का संबंध

अमीरुद्दीन का जन्म डुमराँव, बिहार के एक संगीत प्रेमी परिवार में हुआ। 5-6 वर्ष डुमराँव में बिताकर वह नाना के घर, ननिहाल काशी में आ गया।

डुमराँव और शहनाई का गहरा संबंध है — शहनाई बजाने के लिए रीड का प्रयोग होता है। रीड नरकट से बनाई जाती है जो डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है। इसीलिए डुमराँव का महत्व है।

🎵 भाग 3 — रसूलनबाई और बतूलनबाई का प्रभाव

अमीरुद्दीन की उम्र अभी 14 साल है। बालाजी मंदिर तक जाने का एक रास्ता रसूलनबाई और बतूलनबाई के घर से होकर जाता है। इस रास्ते से न जाने कितने तरह के बोल-बनाव — कभी ठुमरी, कभी टप्पे, कभी दादरा — की मार्फत ड्योढ़ी तक पहुँचते रहते हैं।

रसूलन और बतूलन जब गाती हैं तो अमीरुद्दीन को खुशी मिलती है। बिस्मिल्ला खाँ ने खुद स्वीकार किया है कि उनके जीवन के आरंभिक दिनों में संगीत के प्रति आसक्ति इन्हीं गायिका बहनों को सुनकर मिली। इन्हीं ने उनकी अबोध उम्र में संगीत प्रेरणा की वर्णमाला लिखी।

🙏 भाग 4 — बिस्मिल्ला खाँ की साधना

बिस्मिल्ला खाँ अस्सी बरस से सुर माँग रहे हैं। सच्चे सुर की नेमत। अस्सी बरस की पाँचों वक्त वाली नमाज इसी सुर को पाने की प्रार्थना में खर्च हो जाती है।

🙏 बिस्मिल्ला खाँ की प्रार्थना

“मेरे मालिक एक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।”

उनका यकीन है — कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा और अपनी झोली से सुर का फल निकालकर उनकी ओर उछालेगा। अस्सी बरस से बिस्मिल्ला खाँ यही सोचते आए हैं कि सातों सुरों को बरतने की तमीज उन्हें सलीके से अभी तक क्यों नहीं आई।

🕌 भाग 5 — मुहर्रम और बिस्मिल्ला खाँ

बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई के साथ जो एक मुस्लिम पर्व का नाम जुड़ा है वह मुहर्रम है। मुहर्रम का महीना वह होता है जिसमें शिया मुसलमान हजरत इमाम हुसैन एवं उनके कुछ वंशजों के प्रति अजादारी (शोक मनाना) मनाते हैं।

उनके खानदान का कोई व्यक्ति मुहर्रम के दिनों में न तो शहनाई बजाता है, न ही किसी संगीत के कार्यक्रम में शिरकत करता है। आठवीं तारीख उनके लिए खास महत्व की है। इस दिन खाँ साहब खड़े होकर शहनाई बजाते हैं और दालमंडी में फातमान के करीब आठ किलोमीटर की दूरी तक पैदल रोते हुए, नौहा बजाते जाते हैं।

💡 इस दिन कोई राग नहीं बजता। राग-रागिनियों की अदायगी का निषेध है।

😊 भाग 6 — बचपन की मस्ती

सुकून के क्षणों में वे अपनी जवानी के दिनों को याद करते हैं। अपने रियाज को कम, उन दिनों के अपने जुनून को ज्यादा याद करते हैं। पक्के महाल की कुलसुम हलवाइन की कचौड़ी वाली दुकान और गीताबाली और सुलोचना को ज्यादा याद करते हैं।

😄 बचपन की मजेदार बातें
अमीरुद्दीन चार साल का था — छुपकर नाना को शहनाई बजाते सुनता था।
रियाज के बाद जब अपनी जगह से उठकर चले जाते तो ढेरों छोटी-बड़ी शहनाइयों की भीड़ में से नाना वाली शहनाई ढूँढता और एक-एक को फेंककर खारिज करता।
सोचता — “लगता है मीठी वाली शहनाई दादा कहीं और रखते हैं।”
मामू अलीबख्श शहनाई बजाते हुए सम पर आएँ तो धड़ से एक पत्थर जमीन पर मारता था।
थर्ड क्लास की फिल्म के लिए 6 पैसे का टिकट — दो पैसे मामू से, दो मौसी से, दो नानी से लेता था।

🍛 भाग 7 — कुलसुम की कचौड़ी और संगीत

जब सुलोचना की नई फिल्म सिनेमाहाल में आती तो अमीरुद्दीन अपनी कमाई लेकर फिल्म देखने चले जाते। एक अठन्नी मेहनताना। और कुलसुम की देशी घी वाली दुकान। वहाँ की संगीतमय कचौड़ी!

संगीतमय इसलिए क्योंकि कुलसुम जब कलकलाते घी में कचौड़ी डालती थी तो उस समय छन से उठने वाली आवाज में उन्हें सारे आरोह-अवरोह दिख जाते थे। यह बात तय है कि बिस्मिल्ला खाँ रियाजी और स्वादी दोनों रहे हैं।

🛕 भाग 8 — काशी और बिस्मिल्ला खाँ का प्रेम

काशी संस्कृति की पाठशाला है। काशी में बिस्मिल्ला खाँ हैं। काशी से उनका अटूट प्रेम है।

❤️ काशी से प्रेम

बिस्मिल्ला खाँ अक्सर कहते हैं — “क्या करें मियाँ, ई काशी छोड़कर कहाँ जाएँ, गंगा मइया यहाँ, बाबा विश्वनाथ यहाँ, बालाजी का मंदिर यहाँ। यहाँ हमारे खानदान की कई पुश्तों ने शहनाई बजाई है। मरते दम तक न यह शहनाई छूटेगी न काशी।”

जब भी काशी से बाहर रहते हैं तब विश्वनाथ व बालाजी मंदिर की दिशा की ओर मुँह करके बैठते हैं। थोड़ी देर ही सही, मगर उसी ओर शहनाई का प्याला घुमा दिया जाता है।

🏆 भाग 9 — भारतरत्न और फटी तहमद

किसी दिन एक शिष्या ने डरते-डरते खाँ साहब को टोका — “बाबा! अब तो आपको भारतरत्न भी मिल चुका है, यह फटी तहमद न पहना करें।”

खाँ साहब मुस्कुराए और बोले — “धत्! पगली ई भारतरत्न हमको शहनैया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं! तुम लोगों की तरह बनाव सिंगार देखते रहते, तो उमर ही बीत जाती, हो चुकती शहनाई!”

💡 यह प्रसंग बिस्मिल्ला खाँ की सादगी और संगीत के प्रति समर्पण दिखाता है।

😢 भाग 10 — बदलती काशी का दुख

सन् 2000 की बात। पक्के महाल (काशी विश्वनाथ से लगा इलाका) से मलाई बर्फ बेचने वाले जा चुके हैं। देशी घी में बनने वाली कचौड़ी-जलेबी अब कहाँ? खाँ साहब को बड़ी शिद्दत से यह कमी खलती है।

अब संगीतियों के लिए गायकों के मन में कोई आदर नहीं रहा। खाँ साहब अफसोस जताते हैं — अब घंटों रियाज को कौन पूछे!


🎭 बिस्मिल्ला खाँ का चरित्र चित्रण

  • महान संगीतकार: भारतरत्न से सम्मानित शहनाई वादक।
  • सादगी: भारतरत्न मिलने पर भी फटी तहमद पहनते थे।
  • धार्मिक: पाँचों वक्त नमाज — सुर की प्रार्थना के साथ।
  • सांप्रदायिक सौहार्द: मुसलमान होते हुए भी बालाजी मंदिर में बजाते थे।
  • काशी प्रेम: काशी को कभी नहीं छोड़ा।
  • साधक: अस्सी साल तक भी सुर की तलाश जारी रखी।
  • मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक: हिंदू-मुस्लिम दोनों संस्कृतियों को जोड़ा।
📌 Board Exam Tip: चरित्र चित्रण 5 नंबर का प्रश्न है — सभी गुण याद करें।

📚 कठिन शब्दों के अर्थ

शब्दअर्थ
ड्योढ़ीदहलीज, प्रवेश द्वार
नौबतखानाप्रवेश द्वार के ऊपर मंगल ध्वनि बजाने का स्थान
रियाजअभ्यास
मार्फतद्वारा
सुषिर-वाद्यफूँककर बजाए जाने वाले वाद्य
इबादतउपासना, प्रार्थना
तासीरगुण, प्रभाव, असर
नेमतईश्वर की देन, सुख-धन-दौलत
सजदामाथा टेकना
ऊहापोहउलझन, अनिश्चितता
तिलिस्मजादू
गमकखुशबू, सुगंध
अजादारीमातम करना, दुख मनाना
बदस्तूरकायदे से, तरीके से
नैसर्गिकस्वाभाविक, प्राकृतिक
दादशाबाशी
तालीमशिक्षा
जिजीविषाजीने की इच्छा
शिरकतशामिल होना
अलहमदुलिल्लाहतमाम तारीफ ईश्वर के लिए

📝 Board Exam 2026 — महत्वपूर्ण Q&A

📝 2 अंक के प्रश्न

Q1. शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?
उत्तर: डुमराँव को इसलिए याद किया जाता है क्योंकि शहनाई बजाने के लिए रीड का प्रयोग होता है। रीड नरकट (एक प्रकार की घास) से बनाई जाती है जो डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है। इसके अलावा बिस्मिल्ला खाँ का जन्म भी डुमराँव में हुआ था।
Q2. बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?
उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ ने शहनाई को एक साधारण वाद्य से उठाकर विश्व मंच पर स्थापित किया। वे अस्सी वर्षों तक निरंतर शहनाई बजाते रहे। उनकी शहनाई से निकली मंगलध्वनि मंदिर, आजादी के जश्न और हर शुभ अवसर पर गूँजती रही। इसीलिए उन्हें शहनाई की मंगलध्वनि का नायक कहा गया।
Q3. बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक कैसे थे?
उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ मुसलमान थे लेकिन बालाजी मंदिर में शहनाई बजाना उनके खानदान का पेशा था। वे काशी विश्वनाथ जी के प्रति भी अपार श्रद्धा रखते थे। पाँचों वक्त नमाज पढ़ते और हिंदू मंदिरों में भी भक्तिभाव से बजाते। इस प्रकार वे हिंदू-मुस्लिम दोनों संस्कृतियों को जोड़ने वाले मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।

📝 5 अंक के प्रश्न

Q4. बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से उनकी संगीत साधना को किन घटनाओं और व्यक्तियों ने समृद्ध किया?
उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ की संगीत साधना को निम्नलिखित घटनाओं और व्यक्तियों ने समृद्ध किया —

1. रसूलनबाई और बतूलनबाई: इन गायिका बहनों को सुनकर उनमें संगीत के प्रति आसक्ति जगी। इन्होंने उनकी अबोध उम्र में संगीत प्रेरणा की वर्णमाला लिखी।

2. मामू अलीबख्श खाँ: मामू को शहनाई बजाते देखकर सम पर पत्थर मारना — यह बचपन से ही लय की समझ दर्शाता है।

3. कुलसुम की कचौड़ी: घी में कचौड़ी डालने की आवाज में उन्हें आरोह-अवरोह दिखते थे — संगीत हर जगह था।

4. बालाजी मंदिर का रियाज: प्रतिदिन मंदिर में शहनाई बजाना उनकी साधना थी।

5. काशी का वातावरण: काशी की संगीत परंपरा ने उनकी साधना को पोषित किया।
Q5. “फटा सुर न बख्शें, लुंगिया का क्या है” — इस कथन का आशय समझाइए।
उत्तर: यह कथन बिस्मिल्ला खाँ की सादगी और संगीत के प्रति गहरी आस्था को दर्शाता है।

जब एक शिष्या ने उनसे फटी तहमद न पहनने को कहा तो उन्होंने कहा — “पगली, भारतरत्न मुझे शहनाई पर मिला है, लुंगिया पर नहीं!”

इसका आशय है — बिस्मिल्ला खाँ के लिए सबसे महत्वपूर्ण उनका संगीत था, न कि बाहरी दिखावा। वे ईश्वर से सिर्फ अच्छा सुर माँगते थे। लुंगिया (कपड़े) जैसी भौतिक चीजें उनके लिए गौण थीं।

🎯 MCQ — Board Exam 2026

Q1. बिस्मिल्ला खाँ का असली नाम क्या था?

  • (a) शम्सुद्दीन
  • (b) अमीरुद्दीन ✅ सही उत्तर
  • (c) अलीबख्श
  • (d) सादिक हुसैन

Q2. शहनाई को क्या उपाधि दी गई है?

  • (a) सुरों की रानी
  • (b) शाहेनय ✅ सही उत्तर
  • (c) मंगलध्वनि
  • (d) सुरताल

Q3. रीड (नरकट) किस नदी के किनारे पाई जाती है?

  • (a) गंगा
  • (b) यमुना
  • (c) सोन नदी ✅ सही उत्तर
  • (d) सरयू

Q4. बिस्मिल्ला खाँ को कौन सा पुरस्कार मिला?

  • (a) पद्मभूषण
  • (b) पद्मविभूषण
  • (c) भारतरत्न ✅ सही उत्तर
  • (d) अर्जुन पुरस्कार

Q5. मुहर्रम की आठवीं तारीख को बिस्मिल्ला खाँ क्या करते थे?

  • (a) खुशी से शहनाई बजाते
  • (b) रोते हुए नौहा बजाते जाते ✅ सही उत्तर
  • (c) संगीत कार्यक्रम करते
  • (d) मंदिर जाते

Q6. “इबादत” का क्या अर्थ है?

  • (a) संगीत
  • (b) शहनाई
  • (c) उपासना, प्रार्थना ✅ सही उत्तर
  • (d) मंदिर

🎯 Board Exam 2026 — यह जरूर याद करें!

  • बिस्मिल्ला खाँ का असली नाम = अमीरुद्दीन
  • जन्म = डुमराँव, बिहार | पुरस्कार = भारतरत्न
  • शहनाई = सुषिर-वाद्य | उपाधि = शाहेनय
  • रीड = सोन नदी के किनारे (डुमराँव)
  • रसूलनबाई-बतूलनबाई = संगीत प्रेरणा की वर्णमाला
  • मुहर्रम 8वीं तारीख = रोते हुए नौहा बजाना
  • फटी तहमद = सादगी और संगीत समर्पण का प्रतीक
  • काशी = कभी नहीं छोड़ी — मरते दम तक
  • मिली-जुली संस्कृति = हिंदू-मुस्लिम दोनों
  • इस Chapter से 10-12 नंबर के प्रश्न आते हैं

दोस्तों, बिस्मिल्ला खाँ की जिंदगी हमें यह सिखाती है कि सच्ची साधना में कोई भेद नहीं होता — न हिंदू, न मुसलमान। संगीत ही उनकी इबादत थी। उनकी शहनाई आज भी काशी की गलियों में गूँजती है। कोई सवाल हो तो comment करें।

class 10 chapter 1 Hindi : Read Now

class 10 chapter 2 Hindi : Read Now

class 10 chapter 3 Hindi : Read Now

class 10 chapter 4 Hindi : Read Now

Leave a Comment

WhatsApp