
🚂 UP Board Exam 2026 में यह पाठ जरूर पढ़ें!
लखनवी अंदाज़ पाठ से 10-12 नंबर के प्रश्न आते हैं। नवाब साहब का चरित्र और व्यंग्य याद करो — नंबर पक्के! 🎯
यशपाल — लखनवी अंदाज़
Lakhnavi Andaz — पाठ सार • व्यंग्य • MCQ • Q&A • Board Exam 2026
दोस्तों, Class 10 Hindi Chapter 9 यशपाल की कहानी लखनवी अंदाज़ बहुत मजेदार और व्यंग्यात्मक कहानी है। यह एक ट्रेन के डिब्बे में हुई घटना है जो नवाबी शान और दिखावे पर तीखा व्यंग्य करती है। चलिए आसान भाषा में पूरी कहानी समझते हैं।
✍️ लेखक परिचय — यशपाल
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| जन्म | 1903 ई. (फिरोजपुर, पंजाब) |
| मृत्यु | 1976 ई. |
| विधा | कहानी, उपन्यास, व्यंग्य |
| प्रमुख रचना | झूठा सच, दिव्या, देशद्रोही |
| भाषा | सरल हिंदी — व्यंग्यात्मक |
| विशेषता | प्रगतिशील लेखक, व्यंग्यकार |
📖 कहानी का परिचय
यह कहानी एक व्यंग्यात्मक रचना है। कहानी में एक ट्रेन के सेकंड क्लास के डिब्बे में दो लोग मिलते हैं — लेखक और नवाब साहब। नवाब साहब खीरे खाना चाहते थे लेकिन लेखक के सामने नहीं खा सके। उन्होंने खीरे को सूँघकर खिड़की से फेंक दिया।
📖 पूरी कहानी — आसान भाषा में पढ़ो
दोस्तों, प्रश्नों के उत्तर देने से पहले पूरी कहानी एक बार जरूर पढ़ो। जब कहानी समझ में आएगी तभी सवालों के जवाब याद रहेंगे।
🚂 भाग 1 — ट्रेन में चढ़ना
लेखक यशपाल को मुफस्सिल की पैसेंजर ट्रेन पकड़ने की जल्दी थी। भीड़ से बचकर अकेले में नयी कहानी के बारे में सोचने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए उन्होंने सेकंड क्लास का टिकट ले लिया। डिब्बे में चढ़े तो एक लखनऊ की नवाबी नस्ल के सफेदपोश सज्जन पालथी मारे बैठे थे। सामने दो ताजे खीरे तौलिए पर रखे थे।
👀 भाग 2 — दोनों की स्थिति
लेखक के आने से नवाब साहब के एकांत में विघ्न पड़ा। नवाब साहब ने संगति के लिए कोई उत्साह नहीं दिखाया। लेखक भी दूसरी बर्थ पर बैठकर आत्मसम्मान में आँखें चुरा लीं। लेखक ने सोचा — शायद नवाब साहब किसी सफेदपोश के सामने खीरा नहीं खाना चाहते।
🥒 भाग 3 — खीरे की पूरी तैयारी
नवाब साहब ने दृढ़ निश्चय से तौलिया बिछाया। दोनों खीरे खिड़की के बाहर धोए, पोंछे। चाकू से सिर काटे, गोदकर झाग निकाला, करीने से छीलकर फाँकें तौलिए पर सजाईं। फिर जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च की सुर्खी फाँकों पर बुरक दी। मुख खीरे के रसास्वादन की कल्पना से भर गया।
😲 भाग 4 — असली “लखनवी अंदाज़”
नवाब साहब ने खीरे की एक फाँक उठाकर होंठों तक ले गए। फाँक को सूँघा। स्वाद के आनंद में पलकें मुँद गईं। फिर फाँक को खिड़की से बाहर छोड़ दिया! एक-एक फाँक नाक के पास ले जाकर रसास्वादन कर खिड़की के बाहर फेंकते गए। तौलिए से हाथ पोंछे और गुलाबी आँखों से लेखक की ओर देखा — मानो कह रहे हों — “यह है खानदानी रईसों का तरीका!”
😄 भाग 5 — नवाब साहब का जवाब और डकार
थककर लेट गए। फिर नवाब साहब की ओर से भरे पेट के ऊँचे डकार का शब्द सुनाई दिया! बोले — “खीरा लज्जीज होता है लेकिन होता है सकील — नामुराद मेदे पर बोझ डाल देता है।” यानी बिना खाए ही डकार आ गया — यही लखनवी अंदाज़ है!
✍️ भाग 6 — लेखक का व्यंग्य
लेखक ने सोचा — खीरे की कल्पना से पेट भर जाने का डकार आ सकता है तो बिना विचार, घटना और पात्रों के लेखक की इच्छा मात्र से ‘नयी कहानी’ क्यों नहीं बन सकती? यह उन लेखकों पर व्यंग्य है जो बिना ठोस आधार के कहानी लिखते हैं।
📝 पाठ का सार — संक्षेप में
🚂 शुरुआत — ट्रेन में चढ़ना:
लेखक मुफस्सिल की पैसेंजर ट्रेन पकड़ने में देर हो रही थी। उन्होंने भीड़ से बचने के लिए सेकंड क्लास का टिकट लिया। जब वे डिब्बे में चढ़े तो एक सफेदपोश नवाब साहब पहले से बैठे थे। सामने दो ताजे खीरे रखे थे।
😄 लेखक का व्यंग्य:
लेखक ने सोचा — खीरे की सुगंध और स्वाद की कल्पना से ही पेट भर जाने का डकार आ सकता है तो बिना विचार, घटना और पात्रों के लेखक की इच्छा मात्र से ‘नयी कहानी’ क्यों नहीं बन सकती?
🎩 नवाब साहब का “लखनवी अंदाज़”
नवाब साहब ने बहुत यत्न से खीरा काटा, नमक-मिर्च बुरका, अंत में सूँघकर ही खिड़की से बाहर फेंक दिया। खीरे की फाँकों को नाक के पास ले जाकर रसास्वादन कर खिड़की के बाहर फेंकते गए। फिर गुलाबी आँखों से हमारी ओर देख लिया — मानो कह रहे हों — “यह है खानदानी रईसों का तरीका!”
🎭 नवाब साहब का चरित्र चित्रण
- दिखावा पसंद: दूसरे के सामने खीरा खाना शान के खिलाफ लगा।
- झूठा आत्मसम्मान: अकेले सफर में खीरा खरीदा लेकिन खाया नहीं।
- नवाबी शान: खीरे को सूँघकर फेंकना — यह “लखनवी अंदाज़” था।
- संकोची: लेखक के आने से संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया।
- पाखंडी: मेदे पर बोझ का बहाना बनाया।
- खानदानी रईस: खुद को बड़ा दिखाने की कोशिश।
🔑 कहानी का व्यंग्य
यशपाल की यह कहानी कई स्तरों पर व्यंग्य करती है:
| व्यंग्य | किस पर |
|---|---|
| नवाबी दिखावा | झूठी शान पर — खीरा खाना चाहते थे पर नहीं खाया |
| सामंती मानसिकता | नवाबों की पुरानी सोच पर |
| नयी कहानी | उन लेखकों पर जो बिना आधार के कहानी लिखते हैं |
| आत्मसम्मान | झूठे आत्मसम्मान और पाखंड पर |
📚 कठिन शब्दों के अर्थ
📝 Board Exam 2026 — महत्वपूर्ण Q&A
📝 2 अंक के प्रश्न
📝 5 अंक के प्रश्न
1. उन्होंने अकेले सफर में खीरे खरीदे — खाना चाहते थे।
2. लेकिन लेखक के आने पर खाने में संकोच किया।
3. बड़ी एहतियात से खीरे काटे, नमक-मिर्च लगाई।
4. फिर एक-एक फाँक सूँघकर खिड़की से फेंकते रहे।
5. मेदे पर बोझ का बहाना बनाया।
यह सब उनकी नवाबी सनक थी। वे दिखाना चाहते थे कि वे इतने बड़े रईस हैं कि खाने की जरूरत नहीं — सूँघने से ही तृप्त हो जाते हैं।
1. नवाबी दिखावे पर: नवाब साहब खीरा खाना चाहते थे लेकिन शान के कारण नहीं खाया। यह झूठी नवाबी शान और पाखंड पर व्यंग्य है।
2. नयी कहानी पर: लेखक ने सोचा — अगर खीरे की कल्पना से डकार आ सकती है तो बिना घटना-पात्रों के कहानी क्यों नहीं लिख सकते? यह उन लेखकों पर व्यंग्य है जो बिना आधार के कहानी लिखते हैं।
🎯 MCQ — Board Exam 2026
Q1. लखनवी अंदाज़ पाठ के लेखक कौन हैं?
- (a) प्रेमचंद
- (b) यशपाल ✅ सही उत्तर
- (c) स्वयं प्रकाश
- (d) रामवृक्ष बेनीपुरी
Q2. लेखक ने किस श्रेणी का टिकट लिया?
- (a) फर्स्ट क्लास
- (b) सेकंड क्लास ✅ सही उत्तर
- (c) थर्ड क्लास
- (d) स्लीपर
Q3. नवाब साहब के सामने क्या रखा था?
- (a) आम
- (b) दो ताजे खीरे ✅ सही उत्तर
- (c) सेब
- (d) अंगूर
Q4. नवाब साहब ने खीरे के साथ क्या किया?
- (a) खा लिया
- (b) लेखक को दे दिया
- (c) सूँघकर खिड़की से फेंक दिया ✅ सही उत्तर
- (d) वापस रख लिया
Q5. “सकील” का क्या अर्थ है?
- (a) स्वादिष्ट
- (b) हल्का
- (c) आसानी से न पचने वाला ✅ सही उत्तर
- (d) ताजा
Q6. यशपाल किस विधा के लेखक हैं?
- (a) कविता
- (b) कहानी और उपन्यास ✅ सही उत्तर
- (c) नाटक
- (d) रेखाचित्र
🎯 Board Exam 2026 — यह जरूर याद करें!
- लेखक = यशपाल | जन्म = 1903 | पंजाब
- विधा = कहानी, उपन्यास | प्रमुख = झूठा सच
- नवाब साहब = दिखावा + झूठी शान
- खीरा = सूँघकर फेंका — यही लखनवी अंदाज़
- व्यंग्य = नवाबी पाखंड + नयी कहानी पर
- लज्जीज = स्वादिष्ट | सकील = न पचने वाला
- मेदा = आमाशय | तहजीब = शिष्टता
- इस Chapter से 10-12 नंबर के प्रश्न आते हैं
दोस्तों, लखनवी अंदाज़ कहानी हमें यह सिखाती है कि दिखावा और झूठी शान से कुछ हासिल नहीं होता। नवाब साहब ने भूखे रहकर भी शान दिखाई — यह उनकी सनक थी। अगर कोई सवाल हो तो नीचे comment करें।
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