
दोस्तों नमस्कार बोर्ड एग्जाम वर्ल्ड में आपका स्वागत है। साथियों आज हम इस ब्लॉग में प्रकाश का परावर्तन तथा अपवर्तन अध्याय 9 के बारे में आसान भाषा में नोट्स तैयार किए हैं। जो आगामी आने वाली परीक्षाओं के लिए बहुत ही लाभदायक होने वाले हैं हमने इस नोट्स में प्रीवियस ईयर पेपर को भी शामिल किए हैं जो की आपको पेपर का पैटर्न समझने में आसानी होगी। आइए हम पूरा नोट्स एक आसान भाषा में समझते हैं।
- 9.1 प्रकाश का परावर्तन — नियम, गोलीय दर्पण
- दर्पण सूत्र + आवर्धन + चिह्न परिपाटी
- अवतल दर्पण में प्रतिबिंब (सारणी)
- 9.3 प्रकाश का अपवर्तन — स्नेल का नियम
- 9.3.2 अपवर्तनांक + सारणी 9.3
- 9.3.3 गोलीय लेंस — उत्तल व अवतल
- लेंस सूत्र + आवर्धन + लेंस की क्षमता
- उत्तल लेंस में प्रतिबिंब (सारणी 9.4)
- 📜 PYQ 2015–2024 उत्तर सहित
जब प्रकाश किसी चमकीले पृष्ठ से टकराकर वापस आता है — इसे परावर्तन कहते हैं।
(i) आपतन कोण = परावर्तन कोण (∠i = ∠r)
(ii) आपतित किरण, अभिलंब तथा परावर्तित किरण — तीनों एक ही तल में होती हैं।
| पद | परिभाषा |
|---|---|
| ध्रुव (P) | दर्पण का मध्य बिंदु |
| वक्रता केंद्र (C) | गोले का केंद्र जिसका दर्पण भाग है |
| मुख्य अक्ष | P और C से गुज़रने वाली सीधी रेखा |
| मुख्य फोकस (F) | समांतर किरणें परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती/आती-लगती हैं |
| फोकस दूरी (f) | P से F की दूरी → f = R/2 |
| द्वारक (Aperture) | दर्पण का प्रभावी व्यास |
उत्तल दर्पण = अपसारी (किरणें दूर जाती हैं, F आभासी होता है)
🔖 नई कार्तीय चिह्न परिपाटी (Sign Convention)
- सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव (P) से मापी जाती हैं
- मुख्य अक्ष के समांतर दिशा में दूरियाँ मापते हैं
- आपतित प्रकाश की दिशा में → धनात्मक (+)
- आपतित प्रकाश के विपरीत → ऋणात्मक (–)
- बिंब हमेशा दर्पण के सामने → u हमेशा ऋणात्मक
- अवतल दर्पण: f ऋणात्मक | उत्तल दर्पण: f धनात्मक
v = प्रतिबिंब दूरी | u = बिंब दूरी | f = फोकस दूरी | R = 2f
- m धनात्मक → प्रतिबिंब आभासी और सीधा
- m ऋणात्मक → प्रतिबिंब वास्तविक और उलटा
- |m| > 1 → प्रतिबिंब बिंब से बड़ा
- |m| < 1 → प्रतिबिंब बिंब से छोटा
| बिंब की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | साइज़ | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | फोकस F पर | बिंदु आकार | वास्तविक, उलटा |
| C से परे (∞ और C के बीच) | F और C के बीच | छोटा | वास्तविक, उलटा |
| C पर | C पर | समान साइज़ | वास्तविक, उलटा |
| F और C के बीच | C से परे | बड़ा (विवर्धित) | वास्तविक, उलटा |
| F पर | अनंत पर | बहुत बड़ा | वास्तविक, उलटा |
| P और F के बीच | दर्पण के पीछे | बड़ा | आभासी, सीधा |
अवतल दर्पण के उपयोग → दाढ़ी बनाना, डॉक्टर का दर्पण, सोलर कुकर।
पेंसिल पानी में डालने पर मुड़ी हुई क्यों लगती है? — क्योंकि पानी के अंदर से आने वाला प्रकाश दिशा बदलता है → अपवर्तन।
- आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा अभिलंब — तीनों एक ही तल में होते हैं
- स्नेल का नियम: sin i / sin r = स्थिरांक (अपवर्तनांक n₁₂)
- विरल → सघन माध्यम: किरण अभिलंब की ओर झुकती है (i > r)
- सघन → विरल माध्यम: किरण अभिलंब से दूर जाती है (r > i)
- काँच के स्लैब से गुज़रने पर — निर्गत किरण आपतित के समांतर (थोड़ा पार्श्विक विस्थापन)
अपवर्तनांक जितना अधिक → प्रकाश की चाल उतनी कम → माध्यम उतना प्रकाशिक सघन।
| माध्यम | अपवर्तनांक | माध्यम | अपवर्तनांक |
|---|---|---|---|
| वायु | 1.0003 ≈ 1 | क्राउन काँच | 1.52 |
| बर्फ | 1.31 | कनाडा बालसम | 1.53 |
| जल | 1.33 | कार्बन डाइसल्फाइड | 1.63 |
| एल्कोहल | 1.36 | सघन फ्लिंट काँच | 1.65 |
| किरोसिन | 1.44 | रूबी (मणिक्य) | 1.71 |
| तारपीन का तेल | 1.47 | नीलम | 1.77 |
| बेंजीन | 1.50 | हीरा | 2.42 |
| पद | उत्तल लेंस | अवतल लेंस |
|---|---|---|
| प्रकृति | अभिसारी | अपसारी |
| फोकस | वास्तविक (दूसरी तरफ) | आभासी (उसी तरफ) |
| f का चिह्न | + (धनात्मक) | – (ऋणात्मक) |
| क्षमता P | + (धनात्मक) | – (ऋणात्मक) |
| उपयोग | आवर्धक लेंस, कैमरा | दूरदृष्टि दोष सुधार |
v = प्रतिबिंब दूरी | u = बिंब दूरी | f = फोकस दूरी
- उत्तल लेंस → P धनात्मक
- अवतल लेंस → P ऋणात्मक
- संयुक्त लेंस → P = P₁ + P₂ + P₃ …
- f = 1 मीटर → P = 1D | f = 10 cm = 0.1 m → P = 10D
लेंस में: 1/v – 1/u = 1/f m = v/u
याद रखो: दर्पण में जोड़, लेंस में घटाव।
| बिंब की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | साइज़ | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | फोकस F₂ पर | बिंदु, बहुत छोटा | वास्तविक, उलटा |
| 2F₁ से परे | F₂ तथा 2F₂ के बीच | छोटा | वास्तविक, उलटा |
| 2F₁ पर | 2F₂ पर | समान साइज़ | वास्तविक, उलटा |
| F₁ तथा 2F₁ के बीच | 2F₂ से परे | बड़ा | वास्तविक, उलटा |
| F₁ पर | अनंत पर | बहुत बड़ा | प्रतिबिंब नहीं |
| O और F₁ के बीच | बिंब के उसी ओर | बड़ा | आभासी, सीधा |
अवतल लेंस → हमेशा → आभासी, सीधा, छोटा।
📌 आपने क्या सीखा
- ∠i = ∠r — परावर्तन का नियम (सभी दर्पणों पर लागू)
- दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f | f = R/2
- आवर्धन (दर्पण): m = –v/u
- अपवर्तन — एक माध्यम से दूसरे में जाने पर प्रकाश की दिशा बदलना
- स्नेल का नियम: sin i / sin r = n (अपवर्तनांक)
- n = c/v | जल n = 1.33, हीरा n = 2.42
- उत्तल लेंस = अभिसारी (+f) | अवतल लेंस = अपसारी (–f)
- लेंस सूत्र: 1/v – 1/u = 1/f | आवर्धन: m = v/u
- लेंस की क्षमता: P = 1/f | मात्रक = डायऑप्टर (D)
- निर्वात में प्रकाश की चाल = 3×10⁸ m/s (अधिकतम)
CBSE Board Exam — Chapter 9: प्रकाश — परावर्तन तथा अपवर्तन
(a) जल (b) काँच (c) प्लास्टिक (d) मिट्टी
(d) मिट्टी — लेंस बनाने के लिए पारदर्शी माध्यम चाहिए। मिट्टी अपारदर्शी है इसलिए लेंस नहीं बन सकता।
(a) मुख्य फोकस तथा वक्रता केंद्र के बीच (b) वक्रता केंद्र पर (c) वक्रता केंद्र से परे (d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच — जब बिंब P और F के बीच हो तो अवतल दर्पण आभासी, सीधा और बड़ा प्रतिबिंब बनाता है।
(a) लेंस के मुख्य फोकस पर (b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर (c) अनंत पर (d) प्राशिक केंद्र तथा मुख्य फोकस के बीच
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर (2F₁ पर) — जब बिंब 2F₁ पर हो, उत्तल लेंस 2F₂ पर समान साइज़ का वास्तविक, उलटा प्रतिबिंब बनाता है।
(a) दोनों अवतल (b) दोनों उत्तल (c) दर्पण अवतल लेंस उत्तल (d) दर्पण उत्तल लेंस अवतल
(a) दोनों अवतल — अवतल दर्पण: f ऋणात्मक। अवतल लेंस: f ऋणात्मक। दोनों के लिए f = –15 cm → दोनों अवतल।
(a) केवल समतल (b) केवल अवतल (c) केवल उत्तल (d) या तो समतल या उत्तल
(d) या तो समतल या उत्तल — समतल दर्पण: हमेशा सीधा। उत्तल दर्पण: हमेशा आभासी, सीधा, छोटा। अवतल: दूर से उलटा बनता है।
R = +32 cm (उत्तल दर्पण, R धनात्मक)
उत्तल दर्पण की फोकस दूरी = +16 cm
u = –10 cm (बिंब दर्पण के सामने)
m = –3 (वास्तविक प्रतिबिंब → ऋणात्मक)
प्रतिबिंब दर्पण के सामने 30 cm दूर है।
प्रकाश किरण अभिलंब की ओर झुकेगी।
क्योंकि वायु विरल माध्यम (n = 1.0003) और जल सघन माध्यम (n = 1.33) है। विरल से सघन में जाने पर प्रकाश की चाल कम हो जाती है → किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है (i > r)।
n = 1.50, c = 3×10⁸ m/s
काँच में प्रकाश की चाल = 2×10⁸ m/s
f = –15 cm (अवतल), v = –10 cm (आभासी)
लेंस सूत्र से:
1/(–10) – 1/u = 1/(–15)
1/u = 1/(–10) – 1/(–15) = –1/10 + 1/15 = (–3+2)/30 = –1/30
u = –30 cm
आवर्धन:
प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बिंब का 1/3 गुना छोटा है।
| बिंब की स्थिति | प्रतिबिंब | प्रकृति |
|---|---|---|
| अनंत | F₂ पर | वास्तविक, उलटा, बहुत छोटा |
| 2F₁ से परे | F₂ व 2F₂ के बीच | वास्तविक, उलटा, छोटा |
| 2F₁ पर | 2F₂ पर | वास्तविक, उलटा, समान |
| F₁ व 2F₁ बीच | 2F₂ से परे | वास्तविक, उलटा, बड़ा |
| F₁ पर | अनंत | प्रतिबिंब नहीं |
| O व F₁ बीच | उसी ओर | आभासी, सीधा, बड़ा |
आवर्धक लेंस: जब बिंब O और F₁ के बीच हो → आभासी, सीधा, बड़ा प्रतिबिंब → आवर्धक लेंस की तरह काम करता है।
- मुख्य अक्ष के समांतर एक किरण MP अवतल दर्पण पर आपतित होती है
- यह C से गुज़रने वाली अभिलंब पर परावर्तित होती है
- ∠MCP = ∠PCF (परावर्तन के नियम से)
- चूँकि MP || मुख्य अक्ष → ∠MCP = ∠CPF (एकांतर कोण)
- ∴ ∠CPF = ∠PCF → त्रिभुज CPF समद्विबाहु → PF = CF
- CF = R/2 (C दर्पण का केंद्र, CP = R)
- ∴ f = PF = R/2 ✓
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Class 10 Science Chapter 2 : Read Now
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