
साथियों नमस्कार आज हम इस पोस्ट में अध्याय 7 7 जीव जनन कैसे करते हैं संपूर्ण टॉपिक को आसान भाषा में समझेंगे और विगत वर्षों में यहां से कैसे प्रश्न आए हुए हैं उसे भी देखेंगे।
- 7.1 क्या जीव अपनी प्रतिकृति बनाते हैं? + DNA का महत्व
- 7.2 एकल जीवों में अलैंगिक जनन
- 7.2.1–7.2.6 विखंडन, खंडन, पुनरुद्भवन, मुकुलन, कायिक प्रवर्धन, बीजाणु समासंघ
- 7.3 लैंगिक जनन + लैंगिक जनन क्यों?
- 7.3.2 पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन
- 7.3.3 मानव में लैंगिक जनन
- जनन स्वास्थ्य + गर्भनिरोध
- 📜 PYQ 2015–2024 उत्तर सहित
जीव जनन इसलिए नहीं करते क्योंकि उन्हें जीवित रहने के लिए ज़रूरी है — पोषण, श्वसन, उत्सर्जन के बिना जीव जी नहीं सकता लेकिन जनन के बिना जी सकता है। फिर भी जनन इसलिए होता है ताकि प्रजाति का अस्तित्व बना रहे।
- जनन की मूल घटना → DNA की प्रतिकृति बनाना
- DNA प्रतिकृति के साथ कोशिकीय संरचनाओं का सृजन भी होता है
- DNA नकल में कुछ विभिन्नताएँ आती हैं → विकास का आधार
- अत्यधिक विभिन्नता → कोशिका की मृत्यु हो सकती है
- संतान कोशिकाएँ समान होते हुए भी एक-दूसरे से थोड़ी भिन्न होती हैं
विखंडन
कोशिका दो भागों में बँट जाती है
अमीबा → द्विखंडन
प्लैज़्मोडियम → बहुखंडन
खंडन
स्पाइरोगाइरा → टुकड़ों में बँट जाता है, हर टुकड़ा नया जीव बनाता है
पुनरुद्भवन
हाइड्रा, प्लेनेरिया → कट जाने पर हर टुकड़े से नया जीव
मुकुलन
यीस्ट, हाइड्रा → कोशिका से उभार (मुकुल) निकलकर नया जीव बनता है
कायिक प्रवर्धन
गुलाब, गन्ना, आलू → जड़, तना, पत्ती से नए पौधे
यह विशेष पुनरुद्भवन कोशिकाओं द्वारा होता है जो विभाजित होकर अनेक कोशिकाएँ बनाती हैं।
हाइड्रा में कोशिकाओं के नियमित विभाजन से उभार (मुकुल) विकसित होता है → पूरी तरह बढ़कर जनक से अलग हो जाता है।
- पौधों में जड़, तना, पत्ती से नए पौधे उगते हैं
- गुलाब, गन्ना, अंगूर — तने की कलम से
- ब्रायोफिलम — पत्ती की कोर पर कलिकाएँ → नए पौधे
- आलू — आँखों (कलिकाओं) से
- खेती में उपयोग — बीज रहित फल, तेज़ फसल, रोगमुक्त पौधे
- ऊतक संवर्धन — पौधे के शीर्ष भाग की कोशिकाएँ → कृत्रिम माध्यम में → कैलस → नया पौधा
राइजोपस जैसे फफूँदी में — ऊर्ध्व तंतुओं पर गुच्छ बनते हैं जिनमें बीजाणु होते हैं। बीजाणु के चारों ओर मोटी भित्ति → प्रतिकूल परिस्थितियों में बचाव। अनुकूल परिस्थिति में → बीजाणु वृद्धि कर नए राइजोपस बनाता है।
| विधि | जीव | विशेषता |
|---|---|---|
| द्विखंडन | अमीबा, पैरामीशियम | दो बराबर भागों में |
| बहुखंडन | प्लैज़्मोडियम | एक साथ कई संतान |
| खंडन | स्पाइरोगाइरा | तंतु टुकड़ों में |
| पुनरुद्भवन | हाइड्रा, प्लेनेरिया | हर टुकड़े से नया जीव |
| मुकुलन | यीस्ट, हाइड्रा | उभार से नया जीव |
| कायिक प्रवर्धन | गुलाब, आलू, ब्रायोफिलम | जड़/तना/पत्ती से |
| बीजाणु | राइजोपस (फफूँदी) | बीजाणु थैली से |
पुनरुद्भवन ≠ कायिक प्रवर्धन — पुनरुद्भवन जानवरों में, कायिक प्रवर्धन पौधों में।
अलैंगिक जनन MCQ में “मुकुलन द्वारा होता है” → उत्तर: यीस्ट (हाइड्रा भी सही है)।
- लैंगिक जनन में DNA की दो प्रतियों का संयोग होता है
- नई विभिन्नताएँ + पूर्व पीढ़ियों की विभिन्नताएँ → विविधता बढ़ती है
- यह विविधता प्रजाति के अस्तित्व के लिए लाभदायक है
- अलैंगिक जनन में बहुत कम विभिन्नता होती है
लैंगिक जनन → दो जीव, अधिक विभिन्नता, धीमा जनन
लैंगिक जनन से प्रजाति का विकास बेहतर होता है।
पुष्पी पादपों में जनन पुष्प के माध्यम से होता है। पुष्प में जनन अंग होते हैं।
| भाग | नर/मादा | कार्य |
|---|---|---|
| पुंकेसर | नर जनन अंग | परागकोश में पराग कण (नर युग्मक) बनाता है |
| स्त्रीकेसर | मादा जनन अंग | अंडाशय में बीजांड (अंडकोशिका) होते हैं |
| वर्तिकाग्र | — | परागकण प्राप्त करता है (चिपचिपा) |
| वर्तिका | — | परागनलिका का मार्ग |
| अंडाशय | — | बीज में परिवर्तित होता है |
| बाह्यदल | — | रक्षा करता है (हरा) |
| दल (पंखुड़ी) | — | कीटों को आकर्षित (रंगीन) |
- परागण — पराग कण का परागकोश से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण (वायु/जल/कीट)
- स्वपरागण — एक ही पुष्प में परागण
- परपरागण — एक पुष्प के पराग कण दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर
- परागनलिका बनती है → नर युग्मक अंडाशय तक पहुँचता है
- निषेचन — नर + मादा युग्मक का संयोजन → युग्मनज
- बीज बनता है, अंकुरण होता है (चित्र 7.9)
एकलिंगी पुष्प = केवल एक जनन अंग। जैसे पपीता, तरबूज।
- यौवनारंभ — जब जनन-ऊतक परिपक्व होने लगते हैं
- लड़कों में: चेहरे पर बाल, आवाज़ का फटना, शिश्न का बढ़ना
- लड़कियों में: स्तन विकास, मासिक चक्र शुरू, बाल
- ये सभी परिवर्तन 10-12 वर्ष की आयु से शुरू होते हैं
- हर व्यक्ति में एक ही समय पर नहीं होते
| अंग | कार्य |
|---|---|
| वृषण | शुक्राणु बनाना + टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन |
| शुक्रवाहिनी | शुक्राणु को मूत्रमार्ग तक पहुँचाना |
| शुक्राशय | शुक्राणु को तरल माध्यम में रखना |
| प्रोस्टेट ग्रंथि | स्राव → शुक्राणु को पोषण + स्थानांतरण आसान |
| मूत्रमार्ग | शुक्राणु + मूत्र दोनों का मार्ग |
| अंग | कार्य |
|---|---|
| अंडाशय | अंडकोशिका बनाना + एस्ट्रोजन हॉर्मोन |
| अंडवाहिका (फेलोपियन ट्यूब) | अंडकोशिका को गर्भाशय तक ले जाना + निषेचन यहीं होता है |
| गर्भाशय | भ्रूण का पोषण और विकास (9 माह) |
| ग्रीवा | गर्भाशय और योनि को जोड़ती है |
| योनि | शुक्राणु का प्रवेश + शिशु का जन्म |
- मैथुन के समय शुक्राणु योनि में स्थापित होते हैं
- शुक्राणु ऊपर जाकर अंडवाहिका में अंडकोशिका से मिलते हैं
- निषेचन → युग्मनज बनता है
- युग्मनज → भ्रूण → गर्भाशय में स्थापित होता है
- प्लैसेंटा — भ्रूण और माँ के बीच पोषण का आदान-प्रदान
- लगभग 9 माह बाद गर्भाशय की पेशियों के लयबद्ध संकुचन से शिशु का जन्म
| विधि | प्रकार | कैसे काम करती है |
|---|---|---|
| कंडोम | यांत्रिक | शुक्राणु योनि में नहीं जा पाते + STD से बचाव |
| गर्भनिरोधक गोलियाँ | हॉर्मोनल | हॉर्मोन संतुलन बदलकर अंड का मोचन रोकती है |
| कॉपर-T (IUD) | यांत्रिक | गर्भाशय में स्थापित → निषेचन नहीं |
| अंडवाहिका बंद | शल्य | शुक्राणु अंडकोशिका तक नहीं पहुँचते |
| शुक्रवाहिनी बंद | शल्य | शुक्राणु का स्थानांतरण रुक जाता है |
गोलियाँ → हॉर्मोन बदलती हैं।
कॉपर-T → गर्भाशय में।
शल्य विधि → स्थायी लेकिन STD से बचाव नहीं।
📌 आपने क्या सीखा
- जनन → प्रजाति के अस्तित्व के लिए ज़रूरी
- DNA प्रतिकृति → जनन की मूल घटना, विभिन्नताएँ → विकास का आधार
- अलैंगिक जनन → एक जीव, कम विभिन्नता (विखंडन, मुकुलन, पुनरुद्भवन, कायिक प्रवर्धन, बीजाणु)
- लैंगिक जनन → दो जीव, अधिक विभिन्नता → प्रजाति के लिए बेहतर
- पुष्प → पुंकेसर (नर) + स्त्रीकेसर (मादा) → परागण → निषेचन → बीज
- नर जनन: वृषण → शुक्राणु | मादा: अंडाशय → अंडकोशिका
- निषेचन → अंडवाहिका में | भ्रूण → गर्भाशय में 9 माह
- प्लैसेंटा → माँ और भ्रूण के बीच पोषण
- ऋतुस्राव → निषेचन न होने पर गर्भाशय परत का निकलना
- गर्भनिरोध → कंडोम, गोलियाँ, कॉपर-T, शल्य विधि
CBSE Board Exam — Chapter 7: जीव जनन कैसे करते हैं
(a) अमीबा (b) यीस्ट (c) प्लैज़्मोडियम (d) लेस्मानिया
(b) यीस्ट — यीस्ट में छोटे मुकुल उभरकर नए जीव बनते हैं। अमीबा → द्विखंडन, प्लैज़्मोडियम → बहुखंडन, लेस्मानिया → द्विखंडन।
(a) अंडाशय (b) गर्भाशय (c) शुक्रवाहिका (d) डिंबवाहिनी
(c) शुक्रवाहिका — शुक्रवाहिका नर जनन तंत्र का भाग है। मादा में अंडाशय, गर्भाशय, डिंबवाहिनी, योनि होते हैं।
(a) बाह्यदल (b) अंडाशय (c) अंडप (d) पराग कण
(d) पराग कण — परागकोश पुंकेसर का भाग है जिसमें पराग कण (नर युग्मक) बनते हैं।
- लैंगिक जनन में अधिक विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं
- दो जनकों के DNA का संयोजन → नए संयोजन
- विभिन्नताएँ → प्रजाति को पर्यावरणीय बदलावों से बचाती हैं
- जैव विकास में सहायक
- अंडाशय हर माह एक परिपक्व अंड मोचित करता है
- गर्भाशय की आंतरिक परत मोटी हो जाती है (भ्रूण को पोषण देने के लिए)
- यदि निषेचन नहीं हुआ → यह परत ज़रूरी नहीं रहती
- यह परत टूटकर रुधिर + म्यूकस के रूप में बाहर निकलती है = ऋतुस्राव
- इसमें लगभग 28 दिन का चक्र, 2-8 दिन रक्तस्राव
- नर जनन-कोशिकाएँ (शुक्राणु) बनाना
- टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन का उत्पादन एवं स्रवण
- टेस्टोस्टेरॉन → लड़कों में यौवनावस्था के लक्षण नियंत्रित करता है
- वृषण उदर गुहा के बाहर होते हैं क्योंकि शुक्राणु के लिए कम ताप चाहिए
प्लैसेंटा (अपरा) के द्वारा —
- प्लैसेंटा → गर्भाशय की भित्ति में धंसी तश्तरीनुमा संरचना
- माँ के ऊतकों से भ्रूण की ओर रक्तस्थान होते हैं
- भ्रूण को → ग्लूकोज़, ऑक्सीजन, अन्य पदार्थ मिलते हैं
- भ्रूण के अपशिष्ट पदार्थ → माँ के रक्त में → बाहर
- यांत्रिक: कंडोम, डायाफ्राम, योनि में रखने वाली युक्तियाँ
- हॉर्मोनल: गर्भनिरोधक गोलियाँ — अंड मोचन रोकती हैं
- अंतर्गर्भाशयी: कॉपर-T → गर्भाशय में स्थापित
- शल्य: अंडवाहिका/शुक्रवाहिनी बंद — स्थायी
STD से बचाव: केवल कंडोम — क्योंकि यह शारीरिक संपर्क को रोकता है।
परागण से निषेचन:
- परागण: पराग कण का परागकोश से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण (वायु/कीट/जल)
- परागनलिका: पराग कण से परागनलिका बनती है → वर्तिका से अंडाशय तक
- नर युग्मक: परागनलिका से अंडाशय में बीजांड (अंडकोशिका) तक पहुँचता है
- निषेचन: नर + मादा युग्मक → युग्मनज
- बीज निर्माण: युग्मनज → भ्रूण → बीज | अंडाशय → फल | बीजांड → बीज
| एककोशिक जीव | बहुकोशिक जीव |
|---|---|
| सरल विधि — विखंडन/मुकुलन | जटिल विधि आवश्यक |
| पूरी कोशिका विभाजित होती है | विशेष जनन कोशिकाएँ बनती हैं |
| कोशिका-दर-कोशिका विभाजन व्यावहारिक | असंभव — विभिन्न ऊतक, अंग होते हैं |
| उदाहरण: अमीबा, यीस्ट | उदाहरण: स्पाइरोगाइरा, हाइड्रा, मानव |
बहुकोशिक जीवों में पुनरुद्भवन जैसी सरल विधि काम नहीं करती क्योंकि इनमें विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ संगठित होकर ऊतक बनाती हैं।
कायिक प्रवर्धन के कारण:
- बीज उत्पन्न करने की क्षमता खो चुके पौधे — जैसे केला, संतरा, गुलाब
- बीज द्वारा उगाए पौधों की तुलना में तेज़ फसल
- सभी पौधे आनुवंशिक रूप से जनक पौधे के समान
- बीज रहित फल जैसे केला उगाने में उपयोगी
वृषण की भूमिका: शुक्राणु बनाना + टेस्टोस्टेरॉन उत्पादन।
शुक्रवाहिनी का कार्य: शुक्राणुओं को वृषण से मूत्रमार्ग तक पहुँचाना। ये मूत्राशय से आने वाली नली से जुड़कर संयुक्त नली बनाती हैं — मूत्रमार्ग।
नहीं — कॉपर-टी STD से रक्षा नहीं करती।
- कॉपर-T गर्भाशय में स्थापित होती है → निषेचन रोकती है → गर्भनिरोध
- लेकिन यौन क्रिया के दौरान शारीरिक संपर्क होता है → STD हो सकती है
- STD से बचाव के लिए केवल कंडोम प्रभावी है
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