मानव नेत्र तथा रंग बिरंगा संसार Class 10 Notes in Hindi | Human Eye and Colourful World

साथियों आज हम इस पोस्ट में अध्याय 10 मानव नेत्र तथा रंग बिरंगा संसार के बारे में पढ़ेंगे। यह नोट्स बहुत आसान भाषा में बनाई गई है। जो आसानी से समझ सकते हो।

manav netra ka chitra class 10
human eye diagram class 10 in hindi
मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार Class 10 Notes in Hindi | Human Eye NCERT Chapter 10
CLASS 10 · NCERT SCIENCE · CHAPTER 10
मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार
Human Eye and the Colourful World · हिंदी नोट्स
👁️ 🌈 🔭 💡
👁️ 10.1 मानव नेत्र की संरचना

मानव नेत्र एक कैमरे की भाँति काम करता है। यह आसपास की वस्तुओं को देखने में मदद करता है।

मानव नेत्र की संरचना कॉर्निया पुतली परितारिका क्रिस्टलीय लेंस रेटिना काचाभ द्रव दृक् तंत्रिका पक्ष्माभि पेशियाँ प्र.
चित्र 10.1: मानव नेत्र की संरचना
भागकार्य
कॉर्नियानेत्र का अगला पारदर्शी भाग — अधिकांश अपवर्तन यहीं होता है
परितारिका (Iris)काँच के रंग वाला भाग — पुतली का साइज़ नियंत्रित करता है
पुतली (Pupil)प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करने वाला छिद्र (dark hole)
क्रिस्टलीय लेंसरेटिना पर वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिंब बनाता है — अभिनेत्र लेंस
रेटिना / दृष्टिपटलप्रकाश-सुग्राही परदा — प्रतिबिंब यहाँ बनता है
पक्ष्माभि पेशियाँलेंस की वक्रता बदलती हैं → फोकस दूरी बदलती है
काचाभ द्रवनेत्रगोलक को आकार देता है
दृक् तंत्रिकारेटिना से मस्तिष्क तक संकेत भेजती है
स्वच्छ मंडल (Sclerotic) = नेत्र का सफेद बाहरी आवरण।
नेत्र का व्यास ≈ 2.3 cm। नेत्र की सामान्य दृष्टि दूरी = 25 cm
🔭 10.1.1 समंजन क्षमता
समंजन क्षमता (Power of Accommodation) — नेत्र के अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी बदलकर विभिन्न दूरियों की वस्तुओं को रेटिना पर स्पष्ट देखने की क्षमता।
  • पास की वस्तु → पक्ष्माभि पेशियाँ सिकुड़ती हैं → लेंस मोटा → f कम → अधिक अपवर्तन
  • दूर की वस्तु → पेशियाँ शिथिल → लेंस पतला → f अधिक → कम अपवर्तन
  • निकट बिंदु — स्वस्थ नेत्र के लिए = 25 cm
  • दूर बिंदु — स्वस्थ नेत्र के लिए = अनंत
पास → लेंस मोटा (f कम)। दूर → लेंस पतला (f अधिक)। यह Board में हर साल पूछा जाता है!
👓 10.2 दृष्टि दोष
😵

निकट दृष्टि दोष (Myopia)

दोष: दूर की वस्तुएँ धुंधली
कारण: नेत्रगोलक लंबा या लेंस अधिक उत्तल → प्रतिबिंब रेटिना के आगे
सुधार: अवतल लेंस (–ve)

🔭

दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia)

दोष: पास की वस्तुएँ धुंधली
कारण: नेत्रगोलक छोटा या लेंस कम उत्तल → प्रतिबिंब रेटिना के पीछे
सुधार: उत्तल लेंस (+ve)

👴

जरा दूरदर्शिता (Presbyopia)

दोष: पास और दूर दोनों धुंधले
कारण: बुढ़ापे में पक्ष्माभि पेशियाँ कमजोर
सुधार: द्विफोकसी लेंस (bifocal)

दृष्टि दोष — प्रतिबिंब की स्थिति प्रतिबिंब रेटिना निकट दृष्टि अवतल लेंस प्रतिबिंब निकट दृष्टि → अवतल | दूर दृष्टि → उत्तल दूर दृष्टि उत्तल लेंस
दृष्टि दोष — निकट और दूर दृष्टि में प्रतिबिंब की स्थिति
निकट दृष्टि → दूर धुंधला → रेटिना के आगेअवतल (–) लेंस
दूर दृष्टि → पास धुंधला → रेटिना के पीछेउत्तल (+) लेंस
जरा दूरदर्शिता → बुढ़ापा → द्विफोकसी लेंस
🌈 10.3 काँच का प्रिज्म + वर्ण विक्षेपण
वर्ण विक्षेपण (Dispersion) — श्वेत प्रकाश का किसी प्रिज्म से गुज़रने पर सात रंगों में बिखरना
प्रिज्म से वर्ण विक्षेपण (VIBGYOR) प्रिज्म श्वेत प्रकाश V (बैंगनी) I (नीला) B (आसमानी) G (हरा) Y (पीला) O (नारंगी) R (लाल)
प्रिज्म से श्वेत प्रकाश का विक्षेपण — VIBGYOR
VIBGYOR — 7 रंग

बैंगनी  →  नीला  →  आसमानी  →  हरा  →  पीला  →  नारंगी  →  लाल

बैंगनी का अपवर्तन सबसे अधिक → सबसे अधिक झुकता है
लाल का अपवर्तन सबसे कम → सबसे कम झुकता है
मेमोरी ट्रिक: VIBGYOR = Violet Indigo Blue Green Yellow Orange Red

दो प्रिज्म उल्टे रखकर पुनः श्वेत प्रकाश बना सकते हैं — इसे वर्ण संयोजन कहते हैं।

🌅 10.4 वायुमंडलीय अपवर्तन

पृथ्वी का वायुमंडल एकसमान नहीं है — ऊपर से नीचे घनत्व बढ़ता जाता है। इससे प्रकाश का अपवर्तन होता है।

तारों का टिमटिमाना
  • तारे बहुत दूर हैं → बिंदु स्रोत की तरह
  • वायुमंडल की परतें बदलती रहती हैं → प्रकाश का अपवर्तन बदलता है
  • तारे का प्रतिबिंब इधर-उधर हिलता है → टिमटिमाना
  • ग्रह नहीं टिमटिमाते — क्योंकि वे विस्तृत स्रोत हैं, विभिन्न बिंदुओं का अपवर्तन औसत हो जाता है
अग्रिम सूर्योदय / विलंबित सूर्यास्त
  • सूर्य क्षितिज के नीचे होने पर भी दिखाई देता है
  • वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य की किरणें झुककर हमारी आँखों तक पहुँचती हैं
  • दिन की लंबाई 4 मिनट अधिक लगती है
ग्रह टिमटिमाते क्यों नहीं? — क्योंकि वे विस्तृत स्रोत हैं। तारे टिमटिमाते हैं क्योंकि वे बिंदु स्रोत हैं।
🔵 10.5 प्रकाश का प्रकीर्णन + टिंडल प्रभाव
प्रकाश का प्रकीर्णन — जब प्रकाश किसी कण से टकराकर विभिन्न दिशाओं में फैलता है।
टिंडल प्रभाव — कोलॉयड (धुआँ, कोहरा, दूध) में प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण प्रकाश का रास्ता दिखाई देना
उदाहरण: घने जंगल में प्रकाश की किरण दिखना, सुबह कोहरे में हेडलाइट की रोशनी।
रैले का प्रकीर्णन नियम
प्रकीर्णन ∝ 1/λ⁴    (λ = तरंगदैर्ध्य)
  • तरंगदैर्ध्य कम → प्रकीर्णन अधिक
  • बैंगनी का λ सबसे कम → सबसे अधिक प्रकीर्णन
  • लाल का λ सबसे अधिक → सबसे कम प्रकीर्णन
🌈 इंद्रधनुष + आकाश का रंग + सूर्योदय
इंद्रधनुष कैसे बनता है?
  1. वर्षा की गोलाकार बूँदें प्रिज्म की तरह काम करती हैं
  2. सूर्य का प्रकाश बूँद में प्रवेश करते समय अपवर्तन
  3. बूँद के पिछले भाग से आंतरिक परावर्तन
  4. बाहर निकलते समय पुनः अपवर्तन
  5. श्वेत प्रकाश VIBGYOR में विभक्त → इंद्रधनुष
इंद्रधनुष हमेशा सूर्य के विपरीत दिशा में दिखाई देता है।
बाहर → लाल रंग (λ अधिक, कम झुकता है)
अंदर → बैंगनी रंग (λ कम, अधिक झुकता है)
आकाश का रंग नीला क्यों?
  • वायुमंडल के कण नीले रंग का अधिक प्रकीर्णन करते हैं (λ कम)
  • हर दिशा से नीला प्रकाश आँखों तक पहुँचता है → आकाश नीला दिखता है
  • अंतरिक्ष में वायुमंडल नहीं → आकाश काला दिखता है
सूर्योदय / सूर्यास्त का लाल रंग
  • सुबह-शाम सूर्य क्षितिज के पास → प्रकाश को अधिक वायुमंडल पार करना पड़ता है
  • नीला, बैंगनी — अधिक प्रकीर्णन → हमारे पास कम पहुँचता है
  • लाल, नारंगी — कम प्रकीर्णन → अधिक पहुँचता है → सूर्य लाल दिखता है
  • दोपहर में — सूर्य ऊपर → कम वायुमंडल → श्वेत/पीला दिखता है
आकाश नीला = नीले का अधिक प्रकीर्णन।
सूर्य लाल (उदय/अस्त) = लाल का कम प्रकीर्णन → अधिक पहुँचता है।
तारे टिमटिमाते = वायुमंडलीय अपवर्तन।
ये तीनों Board में बार-बार आते हैं!
प्रकीर्णन — आकाश का रंग और सूर्य का रंग सूर्योदय (लाल) नीला प्रकीर्णित दर्शक लाल/ नारंगी
सूर्योदय/सूर्यास्त पर लाल रंग — नीले का प्रकीर्णन, लाल का हमारे पास आना

📌 आपने क्या सीखा

  • मानव नेत्र → कॉर्निया, पुतली, क्रिस्टलीय लेंस, रेटिना, दृक् तंत्रिका
  • समंजन क्षमता → पेशियाँ लेंस की वक्रता बदलती हैं
  • निकट बिंदु = 25 cm | दूर बिंदु = अनंत
  • निकट दृष्टि → रेटिना के आगे → अवतल लेंस
  • दूर दृष्टि → रेटिना के पीछे → उत्तल लेंस
  • जरा दूरदर्शिता → बुढ़ापा → द्विफोकसी लेंस
  • वर्ण विक्षेपण → VIBGYOR | बैंगनी = सबसे अधिक, लाल = सबसे कम
  • टिंडल प्रभाव → कोलॉयड में प्रकाश का रास्ता दिखना
  • प्रकीर्णन ∝ 1/λ⁴ → λ कम = प्रकीर्णन अधिक
  • आकाश नीला = नीले का अधिक प्रकीर्णन
  • सूर्योदय लाल = लाल का कम प्रकीर्णन → ज़्यादा पहुँचता है
  • तारे टिमटिमाते = वायुमंडलीय अपवर्तन
  • इंद्रधनुष = अपवर्तन + आंतरिक परावर्तन + अपवर्तन
📜 PYQ 2015–2024 उत्तर सहित

CBSE Board Exam — Chapter 10: मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार

🔵 MCQ — 1 अंक
20241 अंक निकट दृष्टि दोष का निवारण किस लेंस से होता है?
(a) उत्तल   (b) अवतल   (c) द्विफोकसी   (d) बेलनाकार
✅ उत्तर

(b) अवतल लेंस — निकट दृष्टि में प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनता है। अवतल लेंस प्रकाश को अपसरित करके रेटिना पर प्रतिबिंब बनाता है।

20231 अंक इंद्रधनुष में बाहरी किनारे पर कौन-सा रंग होता है?
(a) बैंगनी   (b) नीला   (c) लाल   (d) हरा
✅ उत्तर

(c) लाल — इंद्रधनुष में बाहर लाल और अंदर बैंगनी रंग होता है। लाल रंग का तरंगदैर्ध्य अधिक होने से कम अपवर्तन → बाहर रहता है।

20221 अंक सात रंगों के प्रकाश में से किसका तरंगदैर्ध्य सबसे कम है?
(a) लाल   (b) हरा   (c) बैंगनी   (d) पीला
✅ उत्तर

(c) बैंगनी — VIBGYOR में बैंगनी का तरंगदैर्ध्य सबसे कम → सबसे अधिक प्रकीर्णन होता है।

20211 अंक ग्रह टिमटिमाते नहीं, तारे टिमटिमाते हैं — क्योंकि:
(a) तारे बिंदु स्रोत हैं   (b) ग्रह बिंदु स्रोत हैं   (c) तारे विस्तृत स्रोत हैं   (d) ग्रह प्रकाश उत्सर्जित नहीं करते
✅ उत्तर

(a) तारे बिंदु स्रोत हैं — तारे बहुत दूर → बिंदु स्रोत → वायुमंडलीय अपवर्तन का प्रभाव। ग्रह पास → विस्तृत स्रोत → विभिन्न बिंदुओं का प्रभाव औसत → नहीं टिमटिमाते।

🟡 लघु उत्तरीय — 2-3 अंक
20243 अंक मानव नेत्र की समंजन क्षमता क्या है? नेत्र पास की और दूर की वस्तुओं को कैसे देखता है? समझाइए।
✅ उत्तर

समंजन क्षमता — नेत्र के अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी बदलकर विभिन्न दूरियों की वस्तुओं को रेटिना पर स्पष्ट देखने की क्षमता।

  • पास की वस्तु: पक्ष्माभि पेशियाँ सिकुड़ती हैं → लेंस मोटा → फोकस दूरी कम → अधिक अपवर्तन → रेटिना पर प्रतिबिंब
  • दूर की वस्तु: पेशियाँ शिथिल → लेंस पतला → फोकस दूरी अधिक → कम अपवर्तन → रेटिना पर प्रतिबिंब
20232 अंक टिंडल प्रभाव क्या है? दो उदाहरण दीजिए।
✅ उत्तर

टिंडल प्रभाव — जब प्रकाश किसी कोलॉयड (सूक्ष्म कणों के मिश्रण) से गुज़रता है तो कण प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं जिससे प्रकाश का मार्ग दिखाई देने लगता है।

  • घने जंगल में पेड़ों के बीच से सूर्य की किरण दिखना
  • कोहरे / धुएँ में हेडलाइट की रोशनी का मार्ग दिखना
20223 अंक निकट दृष्टि दोष क्या है? इसके कारण और सुधार बताइए।
✅ उत्तर

निकट दृष्टि दोष (Myopia):

  • लक्षण: दूर की वस्तुएँ धुंधली, पास की स्पष्ट
  • कारण 1: नेत्रगोलक की लंबाई बढ़ जाना
  • कारण 2: अभिनेत्र लेंस का अधिक उत्तल होना
  • परिणाम: प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनता है
  • सुधार: उपयुक्त क्षमता का अवतल लेंस → किरणें पहले अपसरित → फिर रेटिना पर
20212 अंक आकाश का रंग नीला क्यों होता है? अंतरिक्ष यात्री को आकाश काला क्यों दिखता है?
✅ उत्तर

नीला क्यों: वायुमंडल के सूक्ष्म कण नीले रंग का (कम λ) सबसे अधिक प्रकीर्णन करते हैं। हर दिशा से नीला प्रकाश आँखों तक पहुँचता है → आकाश नीला।

अंतरिक्ष में काला: अंतरिक्ष में वायुमंडल नहीं → प्रकीर्णन नहीं → कोई रंग नहीं → आकाश काला दिखता है।

🔴 दीर्घ उत्तरीय — 5 अंक
20245 अंक इंद्रधनुष कैसे बनता है? चित्र सहित समझाइए। इंद्रधनुष में लाल रंग बाहर और बैंगनी अंदर क्यों होता है?
✅ उत्तर

इंद्रधनुष निर्माण:

  1. वर्षा की गोलाकार बूँदें लघु प्रिज्म की तरह काम करती हैं
  2. सूर्य का श्वेत प्रकाश बूँद में प्रवेश करते समय → पहला अपवर्तन
  3. बूँद के पिछले भाग से → आंतरिक परावर्तन
  4. बूँद से बाहर निकलते समय → दूसरा अपवर्तन
  5. इस दो अपवर्तन और एक परावर्तन से श्वेत प्रकाश VIBGYOR में विभक्त → इंद्रधनुष

बाहर लाल, अंदर बैंगनी क्यों:

  • लाल का λ सबसे अधिक → अपवर्तन कम → कम झुकता है → बाहरी किनारे पर
  • बैंगनी का λ सबसे कम → अपवर्तन अधिक → अधिक झुकता है → अंदरी किनारे पर
इंद्रधनुष हमेशा सूर्य के विपरीत दिशा में और वर्षा के बाद सुबह-शाम दिखता है।
20235 अंक दृष्टि दोषों का वर्णन कीजिए। तीनों दोषों के कारण, लक्षण और सुधार की विधि नामांकित चित्र सहित लिखिए।
✅ उत्तर
दृष्टि दोषलक्षणकारणसुधार
निकट दृष्टिदूर धुंधलानेत्रगोलक लंबा / लेंस अधिक उत्तल → प्रतिबिंब रेटिना के आगेअवतल लेंस
दूर दृष्टिपास धुंधलानेत्रगोलक छोटा / लेंस कम उत्तल → प्रतिबिंब रेटिना के पीछेउत्तल लेंस
जरा दूरदर्शितापास + दूर दोनोंबुढ़ापे में पक्ष्माभि पेशियाँ कमजोर → समंजन क्षमता कमद्विफोकसी लेंस
20193 अंक सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य लाल क्यों दिखाई देता है? दोपहर में श्वेत क्यों?
✅ उत्तर

सूर्योदय/सूर्यास्त पर लाल:

  • सूर्य क्षितिज के पास → प्रकाश को अधिक मोटे वायुमंडल से गुज़रना पड़ता है
  • नीला, बैंगनी, हरा — अधिक प्रकीर्णित → हमारे पास कम पहुँचते हैं
  • लाल, नारंगी — कम प्रकीर्णित → अधिक मात्रा में पहुँचते हैं → सूर्य लाल/नारंगी

दोपहर में श्वेत/पीला:

  • सूर्य ऊपर → कम वायुमंडल पार करना पड़ता है
  • कम प्रकीर्णन → सभी रंग मिलकर आँखों तक पहुँचते हैं → श्वेत/पीला
📚 Class 10 NCERT Science · Chapter 10: मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार
ये नोट्स NCERT Reprint 2025-26 के अनुसार बनाए गए हैं।

class 10 Chapter 1 science : Click Here

class 10 Chapter 2 science : Click Here

class 10 Chapter 3 science : Click Here

class 10 Chapter 4 science : Click Here

class 10 Chapter 5 science : Click Here

Leave a Comment

WhatsApp