जैव प्रक्रम Class 10 Notes Hindi | Life Processes Chapter 5 Full Explanation 2026

जैव प्रक्रम क्लास 10 chapter 5 notes

साथियों नमस्कार Board exam world में आपका स्वागत है, आज हम इस चैप्टर में जैव प्रक्रम के बारे में संपूर्ण अध्ययन करेंगे।जो आपके बुक में chapter 5 हैं।

जैव प्रक्रम Class 10 Notes in Hindi | Life Processes NCERT Chapter 5
Class 10 · NCERT Science · Chapter 5
जैव प्रक्रम
Life Processes — हिंदी नोट्स
❤️ 🌿 🫁 🧫
Reprint 2025-26
🔬 5.1 जैव प्रक्रम क्या है?
वे सभी प्रक्रम जो मिलकर जीव के अनुरक्षण (maintenance) का काम करते हैं, जैव प्रक्रम कहलाते हैं।

सोचो — जब हम सो रहे होते हैं तब भी हमारा शरीर काम करता रहता है। दिल धड़कता है, साँस चलती है, खाना पचता है। ये सब जैव प्रक्रम हैं।

  • जीव की संरचना सुसंगठित होती है — उसे बनाए रखने के लिए ऊर्जा चाहिए
  • ऊर्जा का स्रोत → भोजन
  • ऊर्जा के लिए ऑक्सीजन ज़रूरी → इसे लेने की प्रक्रिया = श्वसन
  • उत्पन्न अपशिष्ट बाहर निकालना = उत्सर्जन
  • सब जगह पहुँचाना = वहन
मुख्य जैव प्रक्रम: पोषण → श्वसन → वहन → उत्सर्जन
🌿 5.2 पोषण

जब हम साइकिल चलाते हैं या सीढ़ियाँ चढ़ते हैं, हम ऊर्जा खर्च करते हैं। यह ऊर्जा भोजन से आती है। पोषण इसी भोजन को प्राप्त करने की प्रक्रिया है।

5.2.1 स्वपोषी पोषण (Autotrophic Nutrition)
जो जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं — जैसे पेड़-पौधे। ये सूर्य की ऊर्जा और CO₂ + H₂O से भोजन बनाते हैं।
प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)
6CO₂ + 12H₂O → क्लोरोफिल + सूर्य प्रकाश → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂O

इस प्रक्रिया में 3 चीज़ें होती हैं:

  1. क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण
  2. प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलना + जल का विखंडन
  3. CO₂ का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन
☀️ सूर्य CO₂ H₂O O₂ ↑ ग्लूकोज़ क्लोरोफिल
चित्र: प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया
क्लोरोप्लास्ट — वह अंगक जिसमें क्लोरोफिल होता है। इसीलिए पत्तियाँ हरी दिखती हैं।
पत्ती की अनुप्रस्थ काट में हरे बिंदु = क्लोरोप्लास्ट
5.2.2 विषमपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition)
जो जीव अपना भोजन दूसरे जीवों से प्राप्त करते हैं। जैसे — हम इंसान, जानवर, फफूँदी, अमीबा।
प्रकारउदाहरणतरीका
शाकाहारीगाय, बकरीपौधे खाते हैं
माँसाहारीशेर, बाघजानवर खाते हैं
सर्वाहारीमनुष्य, कुत्तादोनों खाते हैं
परजीवीअमरबेल, जूँदूसरे से पोषण लेते हैं
मृतोपजीवीफफूँदी, यीस्टमृत जीवों से पोषण
अमीबा में पोषण
(a) अमीबा (b) पादाभ से घेरना (c) खाद्य रिक्तिका (d) पाचन + अवशोषण
चित्र 5.5: अमीबा में पोषण — पादाभ द्वारा भोजन ग्रहण
🍽️ 5.2.4 मनुष्य में पाचन

आहार नाल — मुँह से गुदा तक एक लंबी नली। भोजन इसी से गुजरता है।

मानव पाचन तंत्र मुँह लार → स्टार्च पाचन ग्रसिका आमाशय HCl + पेप्सिन प्रोटीन पाचन क्षुद्रांत्र (पूर्ण पाचन + अवशोषण) बृहदांत्र (जल अवशोषण) गुदा यकृत अग्न्याशय
चित्र: मानव पाचन तंत्र का सरलीकृत आरेख
पाचन क्रिया — अंग-वार
अंगएंज़ाइम / रसक्या पचता है?
मुँहलार (एमाइलेज़)स्टार्च → माल्टोज़
आमाशयHCl + पेप्सिनप्रोटीन का आंशिक पाचन
यकृतपित्त रसवसा का इमल्सीकरण
अग्न्याशयट्रिप्सिन, लाइपेज़प्रोटीन + वसा
क्षुद्रांत्रआँत रसपूर्ण पाचन + अवशोषण
बृहदांत्रजल का अवशोषण
दीर्घरोम (Villi) — क्षुद्रांत्र की भीतरी दीवार पर अँगुली जैसे प्रवर्ध। इनसे अवशोषण का सतही क्षेत्रफल बढ़ता है।
पित्त रस में एंज़ाइम नहीं होता — यह सिर्फ वसा को छोटी गोलिकाओं में तोड़ता है (इमल्सीकरण)। यह बात परीक्षा में अक्सर पूछी जाती है!
🫁 5.3 श्वसन
ग्लूकोज़ जैसे जटिल कार्बनिक यौगिकों का विखंडन जिससे ATP के रूप में ऊर्जा मिलती है — यह श्वसन है।
वायवीय vs अवायवीय श्वसन
वायवीय श्वसनअवायवीय श्वसन
ऑक्सीजन की उपस्थिति मेंऑक्सीजन की अनुपस्थिति में
CO₂ + H₂O बनते हैंलैक्टिक अम्ल / एथेनॉल बनता है
अधिक ऊर्जा — 38 ATPकम ऊर्जा — 2 ATP
माइटोकॉन्ड्रिया मेंकोशिकाद्रव्य में
उदाहरण: हमउदाहरण: यीस्ट, पेशी कोशिका
ग्लूकोज़ का विखंडन ग्लूकोज़ (C₆H₁₂O₆) पायरुवेट (3C) अवायवीय यीस्ट: एथेनॉल + CO₂ पेशी: लैक्टिक अम्ल वायवीय (माइटो॰) CO₂ + H₂O + ऊर्जा 38 ATP 🔋 ऑक्सीजन नहीं ऑक्सीजन + माइटो.
चित्र 5.8: भिन्न पथों द्वारा ग्लूकोज़ का विखंडन
ATP (Adenosine Triphosphate) — ऊर्जा की मुद्रा। जब ATP टूटता है तो ऊर्जा निकलती है जो कोशिका की सभी क्रियाओं के काम आती है।
ADP + फॉस्फेट + ऊर्जा → ATP
मनुष्य में श्वसन तंत्र
मानव श्वसन तंत्र नासाद्वार श्वासनली (उपास्थि वलय) बायाँ दायाँ फुफ्फुस फुफ्फुस कूपिका डायाफ्राम
चित्र 5.9: मानव श्वसन तंत्र
  • कूपिका (Alveoli) — फुफ्फुस में लाखों छोटी थैलियाँ, O₂-CO₂ का आदान-प्रदान यहीं होता है
  • कूपिका की सतह को फैलाएँ तो लगभग 80 वर्ग मीटर होगी
  • हीमोग्लोबिन — लाल रुधिर कणिकाओं में, O₂ का वहन करता है
  • CO₂ रुधिर में घुलित अवस्था में वहन होती है
क्रैम्प क्यों होती है? — अचानक अधिक व्यायाम से पेशी कोशिकाओं में O₂ की कमी → अवायवीय श्वसन → लैक्टिक अम्ल का संचय → दर्द/क्रैम्प।
❤️ 5.4 वहन (Transportation)
5.4.1 मानव में वहन

रुधिर में — प्लाज़्मा (तरल), लाल रुधिर कणिकाएँ (O₂ वहन), श्वेत रुधिर कणिकाएँ (रोग से लड़ना), प्लेटलेट्स (थक्का जमाना)।

मानव हृदय — हमारा पंप
मानव हृदय — 4 कक्ष दायाँ अलिंद बायाँ अलिंद दायाँ निलय बायाँ निलय महाधमनी ← फुफ्फुस से O₂ युक्त फुफ्फुस → को CO₂ वाल्व
चित्र 5.10: मानव हृदय — 4 कक्ष
  • दोहरा परिसंचरण — एक चक्र में रुधिर दो बार हृदय से गुज़रता है
  • धमनियाँ — हृदय से शरीर को रुधिर ले जाती हैं (मोटी भित्ति)
  • शिराएँ — शरीर से हृदय को रुधिर लाती हैं
  • केशिकाएँ — सबसे पतली, पदार्थों का विनिमय यहीं होता है
  • सामान्य रक्तदाब = 120/80 mm Hg
लसिका (Lymph) — रुधिर जैसा रंगहीन तरल, प्रोटीन और वसा का वहन करता है।
5.4.2 पादपों में परिवहन
ऊतकक्या वहन करता है?दिशा
जाइलमजल + खनिज लवणजड़ → पत्ती (ऊपर)
फ्लोएमभोजन (सुक्रोज़)दोनों दिशाएँ
वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) — पत्तियों के रंध्रों से जल का वाष्प बनकर निकलना। यही चूषण दाब बनाता है जिससे जल ऊपर चढ़ता है।
🧫 5.5 उत्सर्जन
वह जैव प्रक्रम जिसमें उपापचय की हानिकारक अपशिष्ट सामग्री का निष्कासन होता है — उत्सर्जन कहलाता है।
5.5.1 मानव में उत्सर्जन

मनुष्य में नाइट्रोजनी अपशिष्ट → यूरिया — यकृत में बनता है, वृक्क छानकर मूत्र के रूप में निकालते हैं।

मानव उत्सर्जन तंत्र बायाँ वृक्क दायाँ वृक्क महा धमनी मूत्राशय मूत्रमार्ग वृक्क धमनी → ← मूत्रवाहिनी
चित्र 5.13: मानव उत्सर्जन तंत्र
वृक्काणु / नेफ्रॉन (Nephron)
नेफ्रॉन = वृक्क की संरचनात्मक + क्रियात्मक इकाई। इसमें बोमन संपुट + वृक्काणु नलिका होती है।
एक वृक्क में लाखों नेफ्रॉन होते हैं।

नेफ्रॉन में प्रक्रिया:

  1. रुधिर से प्राथमिक निस्यंद → बोमन संपुट में छनता है
  2. उपयोगी पदार्थों (ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, जल) का पुनरावशोषण
  3. शेष → मूत्र → मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → बाहर
कृत्रिम वृक्क (Dialysis) — जब वृक्क काम करना बंद कर दे तो अपोहन (dialysis) से रुधिर साफ किया जाता है। एक स्वस्थ व्यक्ति में प्रतिदिन 180 लीटर आरंभिक निस्यंद बनता है लेकिन सिर्फ 1-2 लीटर मूत्र निकलता है!
5.5.2 पादप में उत्सर्जन
  • CO₂ + O₂ — विसरण द्वारा रंध्रों से बाहर
  • अतिरिक्त जल — वाष्पोत्सर्जन द्वारा
  • अपशिष्ट पदार्थ — पुरानी पत्तियों के गिरने पर
  • गोंद, रेजिन — जाइलम में संचित
  • कोशिका रिक्तिका में भी अपशिष्ट जमा रहते हैं

📌 आपने क्या सीखा

  • जीवन की गतियाँ → जैव प्रक्रम → पोषण, श्वसन, वहन, उत्सर्जन
  • स्वपोषी — खुद भोजन बनाते हैं (प्रकाश संश्लेषण)
  • विषमपोषी — दूसरों से भोजन लेते हैं
  • मनुष्य में पाचन — मुँह से गुदा तक, एंज़ाइम द्वारा
  • वायवीय श्वसन → अधिक ऊर्जा | अवायवीय → कम ऊर्जा
  • मानव हृदय — 4 कक्ष, दोहरा परिसंचरण
  • पादप — जाइलम (जल), फ्लोएम (भोजन) वहन करते हैं
  • वृक्क — नेफ्रॉन द्वारा मूत्र बनाते हैं
📜 विगत वर्षों के प्रश्न-उत्तर (PYQ 2015–2024)

CBSE Board Exam — Chapter 5: जैव प्रक्रम

🔵 MCQ — 1 अंक
20231 अंक मनुष्य में वृक्क एक तंत्र का भाग है, जो संबंधित है — (a) पोषण (b) श्वसन (c) उत्सर्जन (d) परिवहन
✅ उत्तर

(c) उत्सर्जन — वृक्क उत्सर्जन तंत्र का मुख्य अंग है। यह रुधिर से यूरिया जैसे नाइट्रोजनी अपशिष्ट छानकर मूत्र बनाता है।

20221 अंक पादप में जाइलम उत्तरदायी है — (a) जल का वहन (b) भोजन का वहन (c) अमीनो अम्ल का वहन (d) ऑक्सीजन का वहन
✅ उत्तर

(a) जल का वहन — जाइलम जड़ों से पत्तियों तक जल एवं खनिज लवणों का वहन करता है। फ्लोएम भोजन का वहन करता है।

20211 अंक स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक है — (a) CO₂ तथा जल (b) क्लोरोफिल (c) सूर्य का प्रकाश (d) उपरोक्त सभी
✅ उत्तर

(d) उपरोक्त सभी — प्रकाश संश्लेषण के लिए CO₂, H₂O, क्लोरोफिल और सूर्य का प्रकाश — ये चारों ज़रूरी हैं।

20201 अंक पायरुवेट के विखंडन से यह कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा देता है और यह क्रिया होती है — (a) कोशिकाद्रव्य (b) माइटोकॉन्ड्रिया (c) हरित लवक (d) केंद्रक
✅ उत्तर

(b) माइटोकॉन्ड्रिया — वायवीय श्वसन में पायरुवेट का पूर्ण विखंडन माइटोकॉन्ड्रिया में होता है जिससे CO₂, H₂O और अधिक ऊर्जा (38 ATP) मिलती है।

🟡 लघु उत्तरीय — 2-3 अंक
20242 अंक स्वपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अंतर है?
✅ उत्तर
स्वपोषीविषमपोषी
खुद भोजन बनाते हैंदूसरों पर निर्भर
क्लोरोफिल होता हैक्लोरोफिल नहीं
पेड़-पौधेजानवर, फफूँदी, मनुष्य
20232 अंक मनुष्य में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है?
✅ उत्तर

O₂ का वहन: फुफ्फुस की कूपिकाओं से रुधिर में आती है → हीमोग्लोबिन से जुड़कर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है → सभी कोशिकाओं तक पहुँचती है।

CO₂ का वहन: कोशिकाओं से CO₂ → रुधिर में घुलित अवस्था में (बाइकार्बोनेट के रूप में) → फुफ्फुस → बाहर।

20222 अंक वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में क्या अंतर है? कुछ जीवों के नाम लिखिए जिनमें अवायवीय श्वसन होता है।
✅ उत्तर
वायवीयअवायवीय
O₂ की उपस्थितिO₂ की अनुपस्थिति
CO₂ + H₂O बनता हैएथेनॉल / लैक्टिक अम्ल
38 ATP2 ATP

अवायवीय जीव: यीस्ट, कुछ जीवाणु। हमारी पेशी कोशिकाएँ भी कभी-कभी अवायवीय श्वसन करती हैं।

20213 अंक हमारे शरीर में वसा का पाचन कैसे होता है? यह प्रक्रिया कहाँ होती है?
✅ उत्तर

वसा का पाचन मुख्यतः क्षुद्रांत्र में होता है।

  1. यकृत से पित्त रस आता है → वसा की बड़ी गोलिकाओं को छोटी गोलिकाओं में तोड़ता है (इमल्सीकरण)
  2. अग्न्याशय से लाइपेज़ एंज़ाइम → वसा को वसा अम्ल + ग्लिसरॉल में तोड़ता है
  3. पचा हुआ वसा → दीर्घरोम (Villi) द्वारा अवशोषित → लसिका में जाता है
20202 अंक भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?
✅ उत्तर
  • लार में एमाइलेज़ (एमाइलिन) एंज़ाइम होता है जो स्टार्च को माल्टोज़ में बदलता है
  • लार भोजन को गीला और मुलायम बनाती है ताकि निगलना आसान हो
  • यह भोजन को गोली जैसे आकार (बोलस) में बदलती है
20192 अंक श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद है?
✅ उत्तर

स्थलीय जीव को लाभ:

  • वायुमंडलीय ऑक्सीजन जल में घुली ऑक्सीजन से बहुत अधिक होती है
  • स्थलीय जीव सीधे वायु से O₂ लेते हैं — आसानी से उपलब्ध
  • जलीय जीव को जल में घुली O₂ के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ता है
  • इसीलिए मछली बहुत तेज़ी से मुँह खोलती-बंद करती है
🔴 दीर्घ उत्तरीय — 5 अंक
20245 अंक मानव में वहन तंत्र के घटक कौन से हैं? इन घटकों के क्या कार्य हैं?
✅ उत्तर

मानव वहन तंत्र के घटक: हृदय, रुधिर और रुधिर वाहिकाएँ।

घटककार्य
हृदय (4 कक्ष)रुधिर को पंप करना, दोहरा परिसंचरण
लाल रुधिर कणिकाएँO₂ का वहन (हीमोग्लोबिन द्वारा)
श्वेत रुधिर कणिकाएँरोग से लड़ना (प्रतिरक्षा)
प्लेटलेट्सरक्त का थक्का बनाना
प्लाज़्माभोजन, CO₂, हार्मोन, अपशिष्ट का वहन
धमनियाँहृदय से अंगों तक रुधिर
शिराएँअंगों से हृदय तक रुधिर
केशिकाएँपदार्थों का विनिमय
लसिकावसा + प्रोटीन का वहन
दोहरा परिसंचरण: एक चक्र में रुधिर दो बार हृदय से गुज़रता है — एक बार फुफ्फुस परिसंचरण (O₂ग्रहण) और एक बार दैहिक परिसंचरण (शरीर को O₂ देना)।
20235 अंक वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।
✅ उत्तर

नेफ्रॉन की रचना:

  • बोमन संपुट — प्याले जैसी संरचना, रुधिर का प्राथमिक छनन यहाँ
  • वृक्काणु नलिका — लंबी नली, पुनरावशोषण होता है
  • संग्राहक वाहिनी — मूत्र एकत्र करती है

क्रियाविधि — 3 चरण:

  1. निस्यंदन: उच्च दाब पर रुधिर बोमन संपुट में छनता है → ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, यूरिया, जल सब छन जाते हैं
  2. पुनरावशोषण: उपयोगी पदार्थ (ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, जल की अधिकांश मात्रा) वापस रुधिर में आ जाते हैं
  3. मूत्र निर्माण: शेष विलय (यूरिया + अतिरिक्त जल + लवण) → मूत्र → मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → बाहर
एक स्वस्थ व्यक्ति में प्रतिदिन 180 लीटर आरंभिक निस्यंद बनता है लेकिन केवल 1-2 लीटर मूत्र बनता है — 99% जल पुनरावशोषित हो जाता है!
20225 अंक फुफ्फुस में कूपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि की तुलना कीजिए।
✅ उत्तर
कूपिका (Alveoli)नेफ्रॉन (Nephron)
फुफ्फुस मेंवृक्क में
गैसों का विनिमयरुधिर का छनन + मूत्र निर्माण
रुधिर वाहिकाओं से घिरीरुधिर वाहिकाओं से घिरी
सतह क्षेत्रफल ≈ 80 m²लाखों नेफ्रॉन मिलकर अधिक सतह
O₂ अंदर, CO₂ बाहरयूरिया + अपशिष्ट → मूत्र बाहर
पतली भित्ति — विसरण आसानपतली भित्ति — छनन आसान

समानता: दोनों में विस्तृत सतह, पतली भित्ति और रुधिर केशिकाओं का जाल होता है — यही कुशल कार्य का रहस्य है।

20195 अंक स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कौन सी हैं और उसके उत्पाद क्या हैं? प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि समझाइए।
✅ उत्तर

आवश्यक परिस्थितियाँ:

  • सूर्य का प्रकाश
  • क्लोरोफिल (क्लोरोप्लास्ट में)
  • CO₂ (वायु से, रंध्रों द्वारा)
  • जल (जड़ों से जाइलम द्वारा)

उत्पाद: ग्लूकोज़ (C₆H₁₂O₆) + ऑक्सीजन + जल

6CO₂ + 12H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂O

क्रियाविधि — 3 चरण:

  1. प्रकाश अवशोषण: क्लोरोफिल सूर्य की ऊर्जा अवशोषित करता है
  2. जल का विखंडन + ऊर्जा रूपांतरण: प्रकाश ऊर्जा → रासायनिक ऊर्जा (ATP), जल → H⁺ + O₂
  3. CO₂ का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन: ATP की ऊर्जा से CO₂ → ग्लूकोज़
ग्लूकोज़ तुरंत उपयोग नहीं होता तो मंड (स्टार्च) के रूप में संचित हो जाता है। रात में क्लोरोफिल नहीं काम करता — तभी पेड़ CO₂ भी लेते हैं।
20183 अंक मनुष्य में दोहरा परिसंचरण की व्याख्या कीजिए। यह क्यों आवश्यक है?
✅ उत्तर

दोहरा परिसंचरण: एक चक्र में रुधिर दो बार हृदय से गुज़रता है।

  1. फुफ्फुस परिसंचरण: हृदय → फुफ्फुस (CO₂ छोड़ना, O₂ लेना) → हृदय
  2. दैहिक परिसंचरण: हृदय → शरीर के सभी अंग (O₂ देना, CO₂ लेना) → हृदय

क्यों आवश्यक है:

  • O₂युक्त और CO₂युक्त रुधिर कभी नहीं मिलते — उच्च दक्षता
  • पक्षियों और स्तनधारियों जैसे उच्च ऊर्जा वाले जीवों को यह ज़रूरी है
  • शरीर का ताप नियमन बना रहता है
📚 Class 10 NCERT Science · Chapter 5: जैव प्रक्रम (Life Processes)
ये नोट्स NCERT Reprint 2025-26 के अनुसार बनाए गए हैं।

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