साथियों आज हम इस पोस्ट में अध्याय 10 मानव नेत्र तथा रंग बिरंगा संसार के बारे में पढ़ेंगे। यह नोट्स बहुत आसान भाषा में बनाई गई है। जो आसानी से समझ सकते हो।

मानव नेत्र एक कैमरे की भाँति काम करता है। यह आसपास की वस्तुओं को देखने में मदद करता है।
| भाग | कार्य |
|---|---|
| कॉर्निया | नेत्र का अगला पारदर्शी भाग — अधिकांश अपवर्तन यहीं होता है |
| परितारिका (Iris) | काँच के रंग वाला भाग — पुतली का साइज़ नियंत्रित करता है |
| पुतली (Pupil) | प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करने वाला छिद्र (dark hole) |
| क्रिस्टलीय लेंस | रेटिना पर वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिंब बनाता है — अभिनेत्र लेंस |
| रेटिना / दृष्टिपटल | प्रकाश-सुग्राही परदा — प्रतिबिंब यहाँ बनता है |
| पक्ष्माभि पेशियाँ | लेंस की वक्रता बदलती हैं → फोकस दूरी बदलती है |
| काचाभ द्रव | नेत्रगोलक को आकार देता है |
| दृक् तंत्रिका | रेटिना से मस्तिष्क तक संकेत भेजती है |
नेत्र का व्यास ≈ 2.3 cm। नेत्र की सामान्य दृष्टि दूरी = 25 cm।
- पास की वस्तु → पक्ष्माभि पेशियाँ सिकुड़ती हैं → लेंस मोटा → f कम → अधिक अपवर्तन
- दूर की वस्तु → पेशियाँ शिथिल → लेंस पतला → f अधिक → कम अपवर्तन
- निकट बिंदु — स्वस्थ नेत्र के लिए = 25 cm
- दूर बिंदु — स्वस्थ नेत्र के लिए = अनंत
निकट दृष्टि दोष (Myopia)
दोष: दूर की वस्तुएँ धुंधली
कारण: नेत्रगोलक लंबा या लेंस अधिक उत्तल → प्रतिबिंब रेटिना के आगे
सुधार: अवतल लेंस (–ve)
दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia)
दोष: पास की वस्तुएँ धुंधली
कारण: नेत्रगोलक छोटा या लेंस कम उत्तल → प्रतिबिंब रेटिना के पीछे
सुधार: उत्तल लेंस (+ve)
जरा दूरदर्शिता (Presbyopia)
दोष: पास और दूर दोनों धुंधले
कारण: बुढ़ापे में पक्ष्माभि पेशियाँ कमजोर
सुधार: द्विफोकसी लेंस (bifocal)
दूर दृष्टि → पास धुंधला → रेटिना के पीछे → उत्तल (+) लेंस
जरा दूरदर्शिता → बुढ़ापा → द्विफोकसी लेंस
बैंगनी → नीला → आसमानी → हरा → पीला → नारंगी → लाल
लाल का अपवर्तन सबसे कम → सबसे कम झुकता है
मेमोरी ट्रिक: VIBGYOR = Violet Indigo Blue Green Yellow Orange Red
दो प्रिज्म उल्टे रखकर पुनः श्वेत प्रकाश बना सकते हैं — इसे वर्ण संयोजन कहते हैं।
पृथ्वी का वायुमंडल एकसमान नहीं है — ऊपर से नीचे घनत्व बढ़ता जाता है। इससे प्रकाश का अपवर्तन होता है।
- तारे बहुत दूर हैं → बिंदु स्रोत की तरह
- वायुमंडल की परतें बदलती रहती हैं → प्रकाश का अपवर्तन बदलता है
- तारे का प्रतिबिंब इधर-उधर हिलता है → टिमटिमाना
- ग्रह नहीं टिमटिमाते — क्योंकि वे विस्तृत स्रोत हैं, विभिन्न बिंदुओं का अपवर्तन औसत हो जाता है
- सूर्य क्षितिज के नीचे होने पर भी दिखाई देता है
- वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य की किरणें झुककर हमारी आँखों तक पहुँचती हैं
- दिन की लंबाई 4 मिनट अधिक लगती है
उदाहरण: घने जंगल में प्रकाश की किरण दिखना, सुबह कोहरे में हेडलाइट की रोशनी।
- तरंगदैर्ध्य कम → प्रकीर्णन अधिक
- बैंगनी का λ सबसे कम → सबसे अधिक प्रकीर्णन
- लाल का λ सबसे अधिक → सबसे कम प्रकीर्णन
- वर्षा की गोलाकार बूँदें प्रिज्म की तरह काम करती हैं
- सूर्य का प्रकाश बूँद में प्रवेश करते समय अपवर्तन
- बूँद के पिछले भाग से आंतरिक परावर्तन
- बाहर निकलते समय पुनः अपवर्तन
- श्वेत प्रकाश VIBGYOR में विभक्त → इंद्रधनुष
बाहर → लाल रंग (λ अधिक, कम झुकता है)
अंदर → बैंगनी रंग (λ कम, अधिक झुकता है)
- वायुमंडल के कण नीले रंग का अधिक प्रकीर्णन करते हैं (λ कम)
- हर दिशा से नीला प्रकाश आँखों तक पहुँचता है → आकाश नीला दिखता है
- अंतरिक्ष में वायुमंडल नहीं → आकाश काला दिखता है
- सुबह-शाम सूर्य क्षितिज के पास → प्रकाश को अधिक वायुमंडल पार करना पड़ता है
- नीला, बैंगनी — अधिक प्रकीर्णन → हमारे पास कम पहुँचता है
- लाल, नारंगी — कम प्रकीर्णन → अधिक पहुँचता है → सूर्य लाल दिखता है
- दोपहर में — सूर्य ऊपर → कम वायुमंडल → श्वेत/पीला दिखता है
सूर्य लाल (उदय/अस्त) = लाल का कम प्रकीर्णन → अधिक पहुँचता है।
तारे टिमटिमाते = वायुमंडलीय अपवर्तन।
ये तीनों Board में बार-बार आते हैं!
📌 आपने क्या सीखा
- मानव नेत्र → कॉर्निया, पुतली, क्रिस्टलीय लेंस, रेटिना, दृक् तंत्रिका
- समंजन क्षमता → पेशियाँ लेंस की वक्रता बदलती हैं
- निकट बिंदु = 25 cm | दूर बिंदु = अनंत
- निकट दृष्टि → रेटिना के आगे → अवतल लेंस
- दूर दृष्टि → रेटिना के पीछे → उत्तल लेंस
- जरा दूरदर्शिता → बुढ़ापा → द्विफोकसी लेंस
- वर्ण विक्षेपण → VIBGYOR | बैंगनी = सबसे अधिक, लाल = सबसे कम
- टिंडल प्रभाव → कोलॉयड में प्रकाश का रास्ता दिखना
- प्रकीर्णन ∝ 1/λ⁴ → λ कम = प्रकीर्णन अधिक
- आकाश नीला = नीले का अधिक प्रकीर्णन
- सूर्योदय लाल = लाल का कम प्रकीर्णन → ज़्यादा पहुँचता है
- तारे टिमटिमाते = वायुमंडलीय अपवर्तन
- इंद्रधनुष = अपवर्तन + आंतरिक परावर्तन + अपवर्तन
CBSE Board Exam — Chapter 10: मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार
(a) उत्तल (b) अवतल (c) द्विफोकसी (d) बेलनाकार
(b) अवतल लेंस — निकट दृष्टि में प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनता है। अवतल लेंस प्रकाश को अपसरित करके रेटिना पर प्रतिबिंब बनाता है।
(a) बैंगनी (b) नीला (c) लाल (d) हरा
(c) लाल — इंद्रधनुष में बाहर लाल और अंदर बैंगनी रंग होता है। लाल रंग का तरंगदैर्ध्य अधिक होने से कम अपवर्तन → बाहर रहता है।
(a) लाल (b) हरा (c) बैंगनी (d) पीला
(c) बैंगनी — VIBGYOR में बैंगनी का तरंगदैर्ध्य सबसे कम → सबसे अधिक प्रकीर्णन होता है।
(a) तारे बिंदु स्रोत हैं (b) ग्रह बिंदु स्रोत हैं (c) तारे विस्तृत स्रोत हैं (d) ग्रह प्रकाश उत्सर्जित नहीं करते
(a) तारे बिंदु स्रोत हैं — तारे बहुत दूर → बिंदु स्रोत → वायुमंडलीय अपवर्तन का प्रभाव। ग्रह पास → विस्तृत स्रोत → विभिन्न बिंदुओं का प्रभाव औसत → नहीं टिमटिमाते।
समंजन क्षमता — नेत्र के अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी बदलकर विभिन्न दूरियों की वस्तुओं को रेटिना पर स्पष्ट देखने की क्षमता।
- पास की वस्तु: पक्ष्माभि पेशियाँ सिकुड़ती हैं → लेंस मोटा → फोकस दूरी कम → अधिक अपवर्तन → रेटिना पर प्रतिबिंब
- दूर की वस्तु: पेशियाँ शिथिल → लेंस पतला → फोकस दूरी अधिक → कम अपवर्तन → रेटिना पर प्रतिबिंब
टिंडल प्रभाव — जब प्रकाश किसी कोलॉयड (सूक्ष्म कणों के मिश्रण) से गुज़रता है तो कण प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं जिससे प्रकाश का मार्ग दिखाई देने लगता है।
- घने जंगल में पेड़ों के बीच से सूर्य की किरण दिखना
- कोहरे / धुएँ में हेडलाइट की रोशनी का मार्ग दिखना
निकट दृष्टि दोष (Myopia):
- लक्षण: दूर की वस्तुएँ धुंधली, पास की स्पष्ट
- कारण 1: नेत्रगोलक की लंबाई बढ़ जाना
- कारण 2: अभिनेत्र लेंस का अधिक उत्तल होना
- परिणाम: प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनता है
- सुधार: उपयुक्त क्षमता का अवतल लेंस → किरणें पहले अपसरित → फिर रेटिना पर
नीला क्यों: वायुमंडल के सूक्ष्म कण नीले रंग का (कम λ) सबसे अधिक प्रकीर्णन करते हैं। हर दिशा से नीला प्रकाश आँखों तक पहुँचता है → आकाश नीला।
अंतरिक्ष में काला: अंतरिक्ष में वायुमंडल नहीं → प्रकीर्णन नहीं → कोई रंग नहीं → आकाश काला दिखता है।
इंद्रधनुष निर्माण:
- वर्षा की गोलाकार बूँदें लघु प्रिज्म की तरह काम करती हैं
- सूर्य का श्वेत प्रकाश बूँद में प्रवेश करते समय → पहला अपवर्तन
- बूँद के पिछले भाग से → आंतरिक परावर्तन
- बूँद से बाहर निकलते समय → दूसरा अपवर्तन
- इस दो अपवर्तन और एक परावर्तन से श्वेत प्रकाश VIBGYOR में विभक्त → इंद्रधनुष
बाहर लाल, अंदर बैंगनी क्यों:
- लाल का λ सबसे अधिक → अपवर्तन कम → कम झुकता है → बाहरी किनारे पर
- बैंगनी का λ सबसे कम → अपवर्तन अधिक → अधिक झुकता है → अंदरी किनारे पर
| दृष्टि दोष | लक्षण | कारण | सुधार |
|---|---|---|---|
| निकट दृष्टि | दूर धुंधला | नेत्रगोलक लंबा / लेंस अधिक उत्तल → प्रतिबिंब रेटिना के आगे | अवतल लेंस |
| दूर दृष्टि | पास धुंधला | नेत्रगोलक छोटा / लेंस कम उत्तल → प्रतिबिंब रेटिना के पीछे | उत्तल लेंस |
| जरा दूरदर्शिता | पास + दूर दोनों | बुढ़ापे में पक्ष्माभि पेशियाँ कमजोर → समंजन क्षमता कम | द्विफोकसी लेंस |
सूर्योदय/सूर्यास्त पर लाल:
- सूर्य क्षितिज के पास → प्रकाश को अधिक मोटे वायुमंडल से गुज़रना पड़ता है
- नीला, बैंगनी, हरा — अधिक प्रकीर्णित → हमारे पास कम पहुँचते हैं
- लाल, नारंगी — कम प्रकीर्णित → अधिक मात्रा में पहुँचते हैं → सूर्य लाल/नारंगी
दोपहर में श्वेत/पीला:
- सूर्य ऊपर → कम वायुमंडल पार करना पड़ता है
- कम प्रकीर्णन → सभी रंग मिलकर आँखों तक पहुँचते हैं → श्वेत/पीला
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