यह दंतुरित मुसकान Class 10 Hindi Notes 2026 | Nagarjun UP Board

नमस्कार साथियों बोर्ड एग्जाम बोर्ड में आपका स्वागत है साथियों हमने यह नोटिस बहुत ही सरलता के साथ प्रस्तुत किया है जिसे पढ़ने पर बहुत ही आसानी के साथ समझ में आ जाएगा।

📢 Board Exam 2026 में यह Chapter जरूर आएगा!

नागार्जुन की कविता से 8-10 नंबर के प्रश्न आते हैं। वात्सल्य भाव और अलंकार याद करो — नंबर पक्के! 🎯

🌸 CHAPTER 5 • HINDI KSHITIJ • CLASS 10

नागार्जुन — यह दंतुरित मुसकान

Yeh Danturit Muskan — भावार्थ • अलंकार • MCQ • Q&A • Board Exam 2026

📚 हिंदी क्षितिज 📖 Chapter 5 🎯 UP Board 2026 ✅ Board Exam Ready

दोस्तों, इस पोस्ट में हमने Class 10 Hindi Chapter 5 नागार्जुन की कविता यह दंतुरित मुसकान के सम्पूर्ण नोट्स तैयार किए हैं। UP Board Exam 2026 के लिए यह notes बहुत उपयोगी हैं।


✍️ कवि परिचय — नागार्जुन

जन्म
1911 ई. (दरभंगा, बिहार)
मृत्यु
1998 ई.
असली नाम
वैद्यनाथ मिश्र
उपनाम
जनकवि
भाषा
खड़ीबोली, मैथिली
प्रमुख रचना
युगधारा, सतरंगे पंखों वाली

नागार्जुन के बारे में महत्वपूर्ण बातें:

  • नागार्जुन को “जनकवि” कहा जाता है — आम लोगों के कवि।
  • इनका असली नाम वैद्यनाथ मिश्र था।
  • इन्होंने हिंदी और मैथिली दोनों में लिखा।
  • इनकी कविता में प्रकृति प्रेम, वात्सल्य और सामाजिक चेतना है।
  • यह कविता वात्सल्य भाव पर आधारित है।
📌 Board Exam Tip: नागार्जुन का असली नाम, उपनाम और भाषा जरूर याद करें।

📖 कविता का परिचय

यह दंतुरित मुसकान — इस कविता में कवि एक छोटे बच्चे की दंतुरित (दाँत निकलते समय की) मुस्कान का वर्णन करता है। बच्चे की मुस्कान देखकर कवि का मन प्रसन्न हो जाता है।

💡 मुख्य भाव: बच्चे की मुस्कान में इतनी शक्ति है कि वह मृत व्यक्ति में भी जान डाल सकती है।
📌 Board Exam Tip: कविता का मुख्य भाव परीक्षा में जरूर पूछा जाता है।

📜 कविता — यह दंतुरित मुसकान (मूल पाठ)

🌸 पहला भाग
तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान
मृतक में भी डाल देगी जान
धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात…
छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात
परस पाकर तुम्हारा ही प्राण,
पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण
🌸 दूसरा भाग
छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल
बाँस था कि बबूल?
तुम मुझे पाए नहीं पहचान?
देखते ही रहोगे अनिमेष!
थक गए हो?
आँख लूँ मैं फेर?
क्या हुआ यदि हो सके परिचित न पहली बार?
यदि तुम्हारी माँ न माध्यम बनी होती आज
मैं न सकता देख
मैं न पाता जान
तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान
धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य!
चिर प्रवासी मैं इतर, मैं अन्य!
इस अतिथि से प्रिय तुम्हारा क्या रहा संपर्क
डँगलियाँ माँ की कराती रही हैं मधुपर्क
देखते तुम इधर कनखी मार
और होतीं जब कि आँखें चार
तब तुम्हारी दंतुरित मुसकान
मुझे लगती बड़ी ही छविमान!

📝 कठिन शब्दों के अर्थ

शब्दअर्थ
दंतुरित मुसकानदाँत निकलते समय की मुस्कान
मृतकमरा हुआ व्यक्ति
धूलि-धूसरधूल से भरा हुआ
गातशरीर
जलजातकमल का फूल
परसस्पर्श
पाषाणपत्थर
शेफालिकाहरसिंगार का फूल
अनिमेषबिना पलक झपकाए
चिर प्रवासीहमेशा बाहर रहने वाला
मधुपर्कमधु और दूध का मिश्रण — स्वागत
कनखी मारतिरछी नजर से देखना
छविमानसुंदर, आकर्षक

📖 कविता का भावार्थ

पहले भाग का भावार्थ:

कवि बच्चे की दंतुरित मुस्कान देखकर कहता है — “तुम्हारी यह मुस्कान मृत व्यक्ति में भी जान डाल देगी।”

बच्चे का धूल से भरा शरीर देखकर कवि को लगता है जैसे कमल का फूल तालाब छोड़कर झोंपड़ी में खिल रहा है। बच्चे का स्पर्श पाकर कठिन पत्थर भी पिघलकर जल बन गया होगा।

दूसरे भाग का भावार्थ:

कवि बच्चे से कहता है — “तुम्हें छूने से हरसिंगार के फूल झरने लगे। क्या तुमने मुझे पहचाना नहीं?”

कवि कहता है — “अगर तुम्हारी माँ माध्यम न बनती तो मैं तुम्हारी यह मुस्कान न देख पाता। धन्य हो तुम, धन्य है तुम्हारी माँ!”

कवि कहता है — “मैं बाहर रहने वाला हूँ। माँ की उँगलियाँ तुम्हारा स्वागत करती हैं। जब तुम तिरछी नजर से देखते हो और आँखें मिलती हैं — तब तुम्हारी दंतुरित मुस्कान बड़ी सुंदर लगती है!”

💡 मुख्य संदेश: बच्चे की निश्छल मुस्कान में असीम शक्ति है। माँ का महत्व भी इस कविता में दिखाया गया है।

✨ काव्य विशेषताएं और अलंकार

अलंकारपंक्तिकारण
उपमाछोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजातबच्चे की तुलना कमल से
उत्प्रेक्षापिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाणपत्थर के पिघलने की कल्पना
अनुप्रासधूलि-धूसर‘ध’ वर्ण की आवृत्ति
मानवीकरणडँगलियाँ माँ की कराती रही हैं मधुपर्कउँगलियों को मानव की तरह
📌 Board Exam Tip: उपमा और उत्प्रेक्षा अलंकार परीक्षा में जरूर पूछे जाते हैं।

📝 Board Exam 2026 — महत्वपूर्ण Q&A

📝 2 अंक के प्रश्न

Q1. “दंतुरित मुसकान” से कवि का क्या अभिप्राय है?
उत्तर: दंतुरित मुसकान से कवि का अभिप्राय है — बच्चे के दाँत निकलने के समय की मुस्कान। यह मुस्कान इतनी निश्छल और सुंदर है कि कवि कहता है यह मृत व्यक्ति में भी जान डाल सकती है।
Q2. कवि बच्चे की तुलना किससे करता है?
उत्तर: कवि बच्चे की तुलना कमल के फूल (जलजात) से करता है। जैसे कमल तालाब में खिलता है उसी तरह बच्चा धूल से भरे शरीर के साथ भी सुंदर लगता है। कवि को लगता है जैसे कमल तालाब छोड़कर उनकी झोंपड़ी में आ गया है।
Q3. माँ की क्या भूमिका बताई गई है?
उत्तर: कवि कहता है कि अगर माँ माध्यम न बनती तो वह बच्चे की दंतुरित मुस्कान नहीं देख पाता। माँ की उँगलियाँ बच्चे का स्वागत करती हैं। इसलिए कवि कहता है — “धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य!”

📝 5 अंक के प्रश्न

Q4. यह दंतुरित मुसकान कविता का भावार्थ लिखिए।
उत्तर: इस कविता में कवि नागार्जुन एक छोटे बच्चे की दंतुरित मुस्कान का वर्णन करते हैं।

पहले भाग में: कवि कहता है कि बच्चे की मुस्कान मृत व्यक्ति में भी जान डाल सकती है। बच्चे का धूल से भरा शरीर कमल जैसा सुंदर है। बच्चे का स्पर्श पाकर कठिन पत्थर भी पिघल जाएगा।

दूसरे भाग में: कवि बच्चे से पूछता है — “क्या तुमने मुझे पहचाना नहीं?” माँ का धन्यवाद करते हुए कवि कहता है कि माँ के कारण ही वह यह मुस्कान देख सका।

जब बच्चा तिरछी नजर से देखता है और आँखें मिलती हैं — तब उसकी दंतुरित मुस्कान बड़ी सुंदर लगती है।

🎯 MCQ — Board Exam 2026

Q1. नागार्जुन का असली नाम क्या था?

  • (a) सूर्यकांत त्रिपाठी
  • (b) वैद्यनाथ मिश्र ✅ सही उत्तर
  • (c) जयशंकर प्रसाद
  • (d) रामधारी सिंह

Q2. दंतुरित मुसकान का अर्थ क्या है?

  • (a) बड़े दाँतों की मुस्कान
  • (b) दाँत निकलते समय की मुस्कान ✅ सही उत्तर
  • (c) टूटे दाँतों की मुस्कान
  • (d) नकली मुस्कान

Q3. कवि ने बच्चे की तुलना किससे की?

  • (a) गुलाब से
  • (b) चाँद से
  • (c) कमल के फूल से ✅ सही उत्तर
  • (d) तारे से

Q4. नागार्जुन को क्या कहा जाता है?

  • (a) मुक्त छंद के जनक
  • (b) जनकवि ✅ सही उत्तर
  • (c) भक्तिकाल के कवि
  • (d) छायावाद के कवि

Q5. “पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण” में कौन सा अलंकार है?

  • (a) उपमा
  • (b) उत्प्रेक्षा ✅ सही उत्तर
  • (c) अनुप्रास
  • (d) रूपक

Q6. “जलजात” का क्या अर्थ है?

  • (a) पानी
  • (b) बारिश
  • (c) कमल का फूल ✅ सही उत्तर
  • (d) नदी

🎯 Board Exam 2026 — यह जरूर याद करें!

  • नागार्जुन असली नाम = वैद्यनाथ मिश्र | जनकवि
  • जन्म = 1911 ई. | दरभंगा, बिहार
  • दंतुरित मुसकान = दाँत निकलते समय की मुस्कान
  • बच्चे की तुलना = कमल के फूल से
  • जलजात = कमल | पाषाण = पत्थर | गात = शरीर
  • उत्प्रेक्षा अलंकार = पाषाण पिघलने की कल्पना
  • माँ की भूमिका = माध्यम बनना
  • इस Chapter से 8-10 नंबर के प्रश्न आते हैं

उम्मीद है कि यह notes आपके UP Board Exam 2026 की तैयारी में मददगार साबित होंगे। अगर कोई सवाल हो तो comment करें।

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