भारत में राष्ट्रवाद का उदय।Class 10 History Important Note NCERT

भारत में राष्ट्रवाद का उदय भारतीय इतिहास का वह महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसने देशवासियों को अंग्रेजी शासन के विरुद्ध एकजुट किया।

उन्नीसवीं शताब्दी के अंत और बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में हुए विभिन्न आंदोलनों,जैसे असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन, ने भारतीयों में स्वतंत्रता की भावना को मजबूत किया।यह अध्याय Class 10 History में अत्यन्त महत्वपूर्ण है और बोर्ड परीक्षा में इससे जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते है।

इस पोस्ट में आप पढ़ेंगे👇

  • भारत में राष्ट्रवाद का उदय कैसे हुआ
  • भारत में राष्ट्रवाद का अर्थ
  • भारत में राष्ट्रवाद उदय के कारण
  • प्रथम विश्व युद्ध और भारत में राष्ट्रवाद
  • गांधी जी द्वारा किए गए प्रारंभिक आंदोलन
  • महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन
  • खिलाफत आंदोलन और राष्ट्रवाद
  • असहयोग आंदोलन 1920
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930
  • भारत में विभिन्न वर्गों की भूमिका
  • भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन की सीमाएं
  • भारत में राष्ट्रवाद का महत्व
  • परीक्षा में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न
  • निष्कर्ष

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भारत में राष्ट्रवाद का उदय कैसे हुआ

भारत में अंग्रेजी शासन के दौरान आर्थिक शोषण सामाजिक असमानता और राजनीतिक अन्याय ने लोगों को एकजुट होने पर मजबूर किया। इसी संघर्ष से भारत में राष्ट्रवाद का उदय हुआ। जिसे आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन को जन्म दिया।

भारत में राष्ट्रवाद का अर्थ

जब भारत में रहने वाले लोगों को यह महसूस होने लगा कि ” यह देश हमारा है,हम सब एक है और हमें मिलकर अपने देश के लिए कुछ करना चाहिए” यही भावना आगे चलकर राष्ट्रवाद कहलायी। यही राष्ट्रवाद का अर्थ है।

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भारत में राष्ट्रवाद के उदय के कारण

भारत में राष्ट्रवाद के उदय का मुख्य कारण अंग्रेजों के अत्याचार, आर्थिक शोषण, भारतीयों के साथ भेदभाव, आधुनिक शिक्षा, प्रेस की भूमिका, राष्ट्रीय आंदोलन और लोगों में स्वतंत्रता की बढ़ती लालसा के कारण भारत में राष्ट्रवाद का उदय का उदय हुआ।

प्रथम विश्व युद्ध और भारत में राष्ट्रवाद

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों ने भारत से धन, कच्चा माल और सैनिक ले गए इससे महंगाई कर और बेरोजगारी बढ़ी,युद्ध समाप्त होने के बाद किए गए वादे को पूरा नहीं किये। जिससे लोग बहुत नाराज हुए।यही नाराजगी भारत में राष्ट्रवाद की भावना को और मज़बूत किया ।

गांधी जी द्वारा किए गए प्रारंभिक आंदोलन

गांधी जी भारत में मुख्य तीन प्रारंभिक आंदोलन किये जो निम्न हैं –

चंपारण सत्याग्रह 1917: बिहार में नील के खेती से परेशान किसानों के लिए महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह किया।जिससे किसानों को न्याय मिला।इसी को चंपारण सत्याग्रह कहा गया।

अहमदाबाद मिल हड़ताल 1918 : महात्मा गांधी जी ने अहमदाबाद में कपड़ा मिल मजदूरों के वेतन को बढ़ाने के लिए आंदोलन किया।

खेड़ा सत्याग्रह 1918: गांधी जी ने फसल खराब होने पर लगान वसूली के विरोध में किसानों का साथ दिए। क्योंकि अंग्रेजों ने लगान में कोई कमी नहीं की जिससे किसानों को लगान देने में बहुत कठिनाइयां हो रही थी। तभी गांधी जी ने खेड़ा सत्याग्रह प्रारंभ किए।

महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन

महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को मजबूत बनाया। चंपारण,खेड़ा और अहमदाबाद आंदोलनों से उन्होंने आम जनता को जोड़ा। असहयोग,सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन ने स्वतंत्रता संघर्ष को जन आंदोलन बना दिया।

खिलाफत आंदोलन और राष्ट्रवाद

खिलाफत आंदोलन प्रथम विश्व युद्ध के बाद शुरू हुआ। खिलाफत आंदोलन का उद्देश्य तुर्की के खलीफा के पद की रक्षा करना था। महात्मा गांधी ने इसे समर्थन देकर असहयोग आंदोलन से जोड़ा, इसमें हिदू मुस्लिम में एकता बढ़ी। और भारत में राष्ट्रवाद की भावना मजबूत हुई ।

असहयोग आंदोलन 1920

असहयोग आंदोलन 1920 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ। इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन का शांतिपूर्ण विरोध करना था। लोगों ने सरकारी स्कूल, कॉलेज, अदालत और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया। लोगों ने खादी वस्त्रों को अपनाया। इस आंदोलन ने जनता में राष्ट्रीय चेतना और आत्मविश्वास को बढ़ावा दिया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930

सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ। इसका उद्देश्य अंग्रेजी कानून का शांतिपूर्ण तरीके से उल्लंघन करना था। गांधी जी ने दांडी यात्रा कर नमक कानून तोड़ा। लोगों ने कर देना बंद कर दिया। सविनय अवज्ञा आंदोलन से आजादी की लड़ाई और तेज हो गयी।

भारत में विभिन्न वर्गों की भूमिका

भारत की आजादी के संघर्ष की लड़ाई में सभी वर्गों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किसानों ने आंदोलन किये, मजदूरों ने हड़तालें की। महिलाओं ने सभाओं और जुलूस में भाग लिया। विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़कर संघर्ष किया व्यापारियों ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया। सभी के सहयोग से राष्ट्रवाद मजबूत हुआ।

भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन की सीमाएं

भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन की कुछ सीमाएं भी थी। सभी वर्ग एक साथ लंबे समय तक शामिल नहीं रह पाए। गरीबों और महिलाओं की समस्याएं पूरी तरह सामने नहीं आ सकी। कई जगह आंदोलन हिंसक हो गया। दलितों और आदिवासियों की भागीदारी सीमित रही इससे आंदोलन की गति कुछ समय तक धीमी पड़ी रही।

भारत में राष्ट्रवाद का महत्व

भारत में राष्ट्रवाद का महत्व बहुत बड़ा रहा। इसने लोगों में देश के प्रति प्रेम और एकता की भावना जगाई। अलग-अलग जाति धर्म और भाषा के लोग एक लक्ष्य स्वतंत्रता के लिए एकजुट हुए। राष्ट्रवाद ने गुलामी के खिलाफ संघर्ष को दिशा दी और आजादी की नींव रखी।

परीक्षा में पुछे गए प्रश्न

उपनिवेशों में राष्ट्रवाद का उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी हुई क्यों थी।

उपनिवेशों में राष्ट्रवाद का उदय इसलिए उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ा था।क्योंकि विदेशी शासक लोगों का शोषण करते थे ।लोग अपने अधिकार,सम्मान और आजादी चाहते थे।जब लोगों ने मिलकर विदेशी शासन का विरोध किया,तब उनमें देश के प्रति प्रेम और एकता की भावना पैदा हुई,जिसे राष्ट्रवाद कहा जाता है।

पहले विश्व युद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया।

पहले विश्व युद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन को और तेज कर दिया। युद्ध के कारण महंगाई बड़ी,कर ज्यादा लगे और लोगों को जबरन सेना में भर्ती किया गया। इससे जनता परेशान हुई।लोगों को लगा विदेशी शासन उनके हित में नहीं है,इसलिए आज़ादी की मांग और आंदोलन मजबूत हो गया।

भारत के लोग रोलैंट एक्ट के विरोध में क्यों थे?

भारत के लोग रोलैंट एक्ट के विरोध में थे क्योंकि इस कानून से सरकार को बिना मुकदमा चलाए लोगों को जेल में डालने का अधिकार मिल गया था।इससे लोगों की आजादी छिन रही थी।भारतीय को यह कानून अन्याय पूर्ण लगने लगा,इसलिए लोगों ने इसका जोरदार विरोध किया।

गांधी जी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला क्यों लिया?

गांधी जी ने असहयोग आंदोलन इसलिए वापस लिया क्योंकि आंदोलन के दौरान हिंसा फैलने लगी थी। चौरी-चौरा की घटना में लोगों ने पुलिस चौकी जला दी थी। गांधी जी अहिंसा में विश्वास करते थे,इसलिए उन्होंने सोचा कि हिंसा के माहौल में आंदोलन जारी रखना सही नहीं है।

जलियांवाला बाग हत्याकांड

जलियांवाला बाग हत्याकांड 1919 में हुआ। अमृतसर मे लोग शांतिपूर्ण सभा कर रहे थे। तभी जनरल डायर ने बिना चेतावनी के गोली चलाने का आदेश दे दिया।इसमें सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए।इस घटना से पूरे देश में गुस्सा फैला और आज़ादी का आंदोलन और तेज़ हो गया।

साइमन कमीशन

साइमन कमीशन 1927 में भारत आया।इसमें कोई भी भारतीय सदस्य नहीं था। इसलिए भारतीयों ने इसे अपमानजनक माना।लोगों ने “साइमन गो बैक”के नारे लगाए और विरोध किया।इस आयोग ने बहिष्कार से भारत में राष्ट्रीय आंदोलन और अधिक मजबूत हो गया।

निष्कर्ष:

भारत में राष्ट्रवाद ने लोगों को एकता त्याग और संघर्ष की भावना दी इसने देशवासियों को गुलामी से मुक्ति के लिए संगठित किया। राष्ट्रवाद के कारण ही आजादी की लड़ाई जन आंदोलन बनी और स्वतंत्र भारत का निर्माण संभव हो सका।

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