भूमंडलीय विश्व का बनना का क्या अर्थ है?।class 10 history Note

क्या अपने कभी सोचा है, कि आज हम विदेशी समान क्यों इस्तेमाल करते है। और यह भी बताइए, कि एक देश की घटना का असर पूरी दुनिया पर कैसे पड़ता है।

इसका मुख्य कारण “भूमंडलीय विश्व का बनना” जब व्यापार,यात्रा तकनीक और संस्कृति ने देशों की सीमाएं पार की,तब दुनिया एक दूसरे से जुड़ने लगी। यही प्रक्रिया इतिहास में भूमंडलीय विश्व के निर्माण के रुप में जानी जाती है।

भूमंडलीय विश्व का अर्थ:

भूमंडलीय विश्व के बनना का अर्थ है, दुनिया का अलग अलग देशों का आपस में जुड़ना। जब लोग, व्यापार, संस्कृति,विचार और तकनीक एक देश से दूसरे देश तक पहुंचने लगे,

तब एक वैश्विक या भूमंडलीय विश्व का निर्माण हुआ। यह प्रक्रिया अचानक से नहीं हुई। बल्कि इसे बनने में कभी समय लगा। यह प्रक्रिया बहुत धीरे धीरे हुई है।

पूर्व – आधुनिक विश्व ( Pre – Morden World 🌎)

रेशम मार्ग: रेशम मार्ग (Resham Marg) प्राचीन समय का एक प्रसिद्ध व्यापारिक मार्ग था,जो एशिया,यूरोप और अफ्रीका को जोड़ता था। इसी मार्ग से रेशम,मसाले,कपड़ा और विचारों का आदान प्रदान हुआ। भूमंडलीय विश्व का बनना इसी रेशम मार्ग व्यापार से शुरू हुआ,जिसने देशों को आपस में जोड़ा और दुनिया को करीब लाया।

व्यापारिक मार्ग: व्यापारिक मार्ग वे रस्ते थे जिनसे देशों के बीच वस्तुओं का आदान प्रदान होता था।इन मार्गों ने एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ा। व्यापारिक मार्ग के माध्यम से ही भूमंडलीय विश्व का बनना सम्भव हुआ, क्योंकि व्यापार ने लोगों,संस्कृतियों और विचारों को एक दूसरे को करीब लाया।

यात्राएं: प्राचीन कल में लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती थी। इन यात्राओं से व्यापारिक मार्ग विकसित हुए और देशों के बीच संपर्क बढ़ा। यात्राओं के कारण ही भूमंडलीय विश्व का बनना सम्भव हुआ,क्योंकि लोग, वस्तुएं और विचार पूरी दुनिया में फैले।

भोजन व संस्कृतियों का आदान प्रदान: भोजन व संस्कृतियों का आदान – प्रदान प्राचीन काल से देशों के बीच संपर्क के माध्यम रहा है। यात्राओं और व्यापारिक मार्ग से नए – नए भोजन,मसाले और जीवन शैली एक जगह से दूसरी जगह पहुंचे। ऐसी प्रक्रिया से भूमंडलीय विश्व का बनना सम्भव हुआ। और दुनिया सांस्कृतिक रूप से जुड़ती चली गई।

भूमंडलीय विश्व का बनना दर्शाती फीचर इमेज जिसमें प्राचीन व्यापार मार्ग, रेशम मार्ग, जहाज, रेल, हवाई जहाज, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, IMF और सूचना तकनीक के माध्यम से वैश्वीकरण का विकास दिखाया गया है।

उन्नीसवीं सदी(1815-1914) में वैश्विक अर्थव्यवस्था

औद्योगीकरण: औद्योगिकरण वह प्रक्रिया है।जिसमे मशीनों के माध्यम से बड़े पैमाने पर उत्पादन होने लगता है। औद्योगिकरण के दौरान नए, उद्योग,शहर और रोजगार बढे। क्योंकि औद्योगिकरण ने व्यापार,परिवहन और देशों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत किया।

व्यापार:व्यापार वह प्रक्रिया है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं का लेन देन किया जाता है। प्राचीन काल में व्यापारिक मार्गों के माध्यम से देशों के बीच व्यापार हुआ,क्योंकि व्यापार ने अलग अलग देशों, लोगों और संस्कृतियों को आपस में जोड़ा।

श्रमिकों का पलायन: श्रमिकों का पलायन वह प्रक्रिया जिसमें लोग रोजगार की तलाश में एक देश से दूसरे देश जाते हैं।इस पलायन से श्रम शक्ति का आदान प्रदान हुआउर उद्योगों को कामगार मिले।इसी कारण से वैश्विक अर्थव्यवस्था विकसित हुई।

उन्नीसवीं सदी में भारतीय अर्थव्यवस्था

उपनिवेशवाद: उन्नीसवीं सदी में भारत ब्रिटिश शासन के आधीन था। उपनिवेशवाद का अर्थ है किसी शक्तिशाली देश द्वारा दूसरे देश के संसाधनों का शोषण। इस काल में भारतीय अर्थव्यवस्था को कच्चा माल देने वाला और ब्रिटेन के बने सामान का बाज़ार बना दिया गया,जिससे भारत आर्थिक रूप से कमजोर हुआ।

कच्चा माल: कच्चा माल वह प्राकृतिक वस्तु होती है जिसका उपयोग कारखानों में वस्तुएं बनाने के लिए किया जाता है। जैसे – कपास जूट, गन्ना और कोयला। उपनिवेशवाद के समय भारत से कच्चा माल इंग्लैंड भेजा गया,जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था कमजोर हुई और भूमंडलीय विश्व का बनना व्यापार के माध्यम से आगे बढ़ा ।

कृषि पर प्रभाव: उपनिवेशवाद के समय भारतीय कृषि पर गहरा प्रभाव पड़ा। किसानों को खाद्यान्न की जगह नगदी फसलें उगाने के लिए मजबूर किया गया। इससे भोजन की कमी,कर्ज और गरीबी बढ़ी। इस प्रक्रिया ने भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर किया।

अंतर – युद्ध काल ( Inter War Period 1919-1939)

प्रथम विश्वयुद्ध के बाद की स्थिति : प्रथम विश्व युद्ध के बाद दुनिया की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। कई देशों में बेरोजगारी,महंगाई और आर्थिक मंदी बढ़ी। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार घटा और देशों ने आत्मनिर्भर बनने की कोशिश की।इस अन्तर युद्ध काल ने भूमंडलीय विश्व का बनना धीमा कर दिया और वैश्विक सम्बन्धों में तनाव बढ़ा।

महामंदी: महामंदी 1929 में शुरू हुई एक बड़ी वैश्विक आर्थिक मंदी थी।इसमें उद्योग बंद हुए,व्यापार घटा और लाखों लोग बेरोजगार हो गए। महामंदी के कारण विश्व अर्थव्यवस्था कमजोर हुई।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का विश्व

IMF: (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष): यह एक वैश्विक संगठन है,जिसकी स्थापना 1944 में हुई। इसका कम देशों को आर्थिक संकट के समय ऋण प्रदान करना है। वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर रखना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना है।

World Bank: विश्व बैंक एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है,जिसकी स्थापना 1944 में हुई है। इसका मुख्य उद्देश्य विकासशील देशों को शिक्षा, स्वास्थ्य,कृषि और आधारभूत ढांचे के लिए ऋण व सहायता देना है,ताकि उनकी अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके।

Bretton Woods व्यवस्था: ब्रिटन वुड्स व्यवस्था 1944 में बनी एक अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था थी।इसके तहत विश्व की मुद्राओं को अमेरिकी डॉलर से जोड़ा गया और IMF व WORLD BANK की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाना और युद्ध के बाद भूमंडलीय विश्व का बनना मजबूत करना था।

आज का भूमंडलीय विश्व (समकालीन विश्व)

बहुराष्ट्रीय कंपनियां: बहुराष्ट्रीय कंपनी का मतलब है वह कंपनी जो एक से ज्यादा देशों में अपना कारोबार करती है। यानी इसका मुख्य कार्यालय एक देश में हो सकता है, लेकिन यह विभिन्न देशों में फैक्ट्री,ऑफिस,या बिक्री संचालन चलती है।

सूचना तकनीक: जब हम कंप्यूटर, इंटरनेट या सॉफ्टवेयर की मदद से कोई कम करते है – जैसे मैसेज भेजना,ऑनलाइनबैंकिंग,वीडियो कॉल, डेटा स्टोर करना । यही सब सूचना तकनीक कहलाता है।

वैश्वीकरण का प्रभाव: वैश्वीकरण के प्रभाव का मतलब है कि दुनिया के देशों के बीच व्यापार,निवेश, संस्कृति और विचारों का आदान प्रदान बढ़ने से समाज,अर्थव्यवस्था और जीवनशैली पर जो असर पड़ता है।वैश्वीकरण का प्रभाव कहलाता है।

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भूमंडलीय विश्व का बनना FAQS:

Q.1 भूमंडलीय विश्व का बनना क्या है?

Ans. यह वह प्रक्रिया है जिसमे व्यापार,यात्रा,संस्कृति और तकनीकि के माध्यम से दुनिया के देश आपस में जुड़े। भूमंडलीय विश्व का बनना कहलाता है।

Q.2 भूमंडलीय विश्व का बनना कब से शुरू हुआ?

Ans . इसकी शुरुआत प्राचीन काल में व्यापार मार्गों से हुई,लेकिन 19 वी सदी से बहुत तेजी से बढ़ा।

Q.3 रेशम मार्ग का क्या महत्व था?

Ans रेशम मार्ग ने एशिया,यूरोप और अफ्रीका को जोड़ा।और व्यापार व संस्कृति के प्रसार में सहायता किया।

Q.4 19 वीं सदी में भूमंडलीय विश्व का क्या प्रभाव पड़ा?

Ans . औद्योगिकरण,उपनिवेशवाद और परिवहन साधनों के विकास से वैश्विक संपर्क बढ़ा।

Q.5 भारत पर भूमंडलीय विश्व का क्या प्रभाव पड़ा?

Ans . भारत कच्चा माल सप्लाई करने वाला देश बना,जिससे स्थानीय उद्योग प्रभावित हुए।

Q.6 अन्तर युद्ध काल का वैश्वीकरण का क्या प्रभाव पड़ा?

Ans. प्रथम विश्व युद्ध और महामंदी के कारण वैश्विक व्यापार में गिरावट आई।

Q.7 द्वितीय विश्व युद्व के बाद क्या बदलाव आए?

Ans . IMF और WORLD BANK जैसी संस्थाओं का गठन हुआ,और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिला।

1 thought on “भूमंडलीय विश्व का बनना का क्या अर्थ है?।class 10 history Note”

  1. पढ़ाई का बहुत ही सुगम और सरल एक मार्गदर्शन और लिखित रूप में स्पष्ट सामग्री

    बहुत-बहुत धन्यवाद ऐसी शैक्षिक सामग्री प्रदान करवाने के लिए सर

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