यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय – Class 10 History NCERT Note in Hindi

यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय class 10 History का पहला अध्याय है। इस चैप्टर में हम फ्रांसीसी क्रांति इटली और जर्मनी के एकीकरण, राष्ट्र राज्य की भावना और एनसीईआरटी के महत्वपूर्ण प्रश्नों को आसान भाषा में पढ़ेंगे……

Table of Content

  • यूरोप में राष्ट्रवाद का अर्थ
  • यूरोप में राष्ट्रवाद के कारण
  • फ्रांसीसी क्रांति और राष्ट्रवाद
  • जर्मनी का एकीकरण
  • इटली का एकीकरण
  • राष्ट्रवाद का प्रभाव
  • परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न
यूरोप में राष्ट्रवाद का विकास – फ्रांसीसी क्रांति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक चित्र

यूरोप में राष्ट्रवाद का अर्थ

यूरोप में राष्ट्रवाद का मतलब है – “हम सब एक हैं।”

बहुत पहले यूरोप में लोग छोटे-छोटे राज्यों में बाटे थे। हर राज्य का राजा अलग थे और लोग खुद को अलग मानते थे धीरे-धीरे लोगों को लगा कि अगर हमारी भाषा, इतिहास, संस्कृति और भावनाएं एक जैसी है। तो हमें अलग-अलग क्यों रहना चाहिए?

तब लोगों ने सोचा- “हमारा एक देश होना चाहिए, अपना झंडा, अपनी सरकार और अपने नियम होने चाहिए।”

यही सोच राष्ट्रवाद कहलाती है। राष्ट्रवाद ने लोगों को जोड़ने आजादी पाने और नए देश को बनाने में मदद की। और यही से यूरोप में राष्ट्रवाद की शुरूआत होती है।

यूरोप में राष्ट्रवाद के कारण

यूरोप में राष्ट्रवाद पैदा होने के कई मुख्य कारण थे।

  • सबसे पहला कारण एक जैसी भाषा और संस्कृतिथी। लोग महसूस करने लगे कि हम एक जैसे हैं।
  • दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कारण था राजाओं का अत्याचार लोग राजा की मनमानी से परेशान थे।
  • तीसरा कारण था फ्रांसीसी क्रांति जिसने आजादी समानता और भाईचारे का विचार दिया।
  • चौथा कारण था शिक्षा और अखबार, जिससे लोगों में जागरूकता आई। इसके अलावा व्यापार और रेल ने लोगों को जोड़ा

इन सब कारणों से लोगों में देश के लिए प्यार बढ़ा।जिसे यूरोप में राष्ट्रवाद कहा गया।

फ्रांसीसी क्रांति और राष्ट्रवाद

फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रवाद को जन्म दिया। इस क्रांति से पहले फ्रांस में राजा का पूरा राज था। आम लोग दुखी थे।

फ्रांसीसी क्रांति ने लोगों को सिखाया कि सत्ता राजा की नहीं जनता की होती है। स्वतंत्रता समानता और भाईचारा का नारा लोगों के दिल में बस गया । फ्रांसीसी क्रांति ने लोगों के मन मे राष्ट्रवाद का भाव जागृत कर दिया।

लोगों को पहली बार लगा कि देश हम सबका है,यही भावना राष्ट्रवाद कहलाती है। फ्रांसीसी क्रांति ने पूरे यूरोप में लोगों को अपने देश के लिए जागरूक कर दिया। यही से यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय हुआ।

जर्मनी का एकीकरण

पहले जर्मनी कई छोटे छोटे राज्यों में बटा हुआ था, हर राज्य का राजा अलग थे।लोग एक जैसी भाषा, संस्कृति और सोच रखते थे। फिर भी अलग अलग थे।

लोगों ने सोचना शुरू किया – ” हम एक जैसे है,तो एक देश क्यों न बने?” प्रशा ने एकीकरण में सबसे बड़ा काम किया है। बिस्मार्क ने युद्ध और समझदारी से सब राज्यों को जोड़ा।1871 में जर्मनी एक देश बना ।यही जर्मनी का एकीकरण कहलाता है।

इटली का एकीकरण

शुरुआती दौर में इटली भी कई छोटे-छोटे राज्यों में बटा हुआ था। कही राजा थे, कहीं विदेशी शासक थे।लोग बहुत इन राजाओं से दुखी थे।

सब लोग एक जैसी भाषा और संस्कृति बोलते थे।उन्हें लगा – “हम एक है तो देश भी एक होना चाहिए।”

मैजिनी ने लोगों में जागरूकता फलाई। कैबूर ने राजनीति से राज्यों को जोड़ा, गैरीबल्डी ने सेना के बल पर मदद किया। 1861 में इटली एक देश बना। इसी को इटली का एकीकरण कहते हैं।

राष्ट्रवाद का प्रभाव

राष्ट्रवाद ने लोगों को एक दूसरे से जोड़ दिया,और लोग अपने देश से प्यार करने लगे।

इससे कई छोटे छोटे राज्य मिलकर नए देश बने,जैसे जर्मनी और इटली।लोगों में आजादी की भावना आई और राजा की ताकत कम हुई।समान कानून और एक सरकार बनी।

राष्ट्रवाद से शिक्षा, भाषा और संस्कृति को बढ़ावा मिला।लोग अपने देश के लिए कम करने लगे।लेकिन कभी – कभी ज्यादा राष्ट्रवाद से देशों में झगड़े और युद्ध भी हुए।

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परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न

ज्योत्सेपे मेत्सानी कौन थे –

ज्योत्सेपे मेत्सानी इटली के महान राष्ट्रवादी नेता, विचारक और क्रांतिकारी थे। उनका जन्म 1805 ई में इटली के जिनेवा शहर में हुआ था। वे इटली छोटे – छोटे राज्यों से मुक्त कर एक एकीकृत, स्वतंत्र और गणराज्य बनाना चाहते थे। मेत्सानी ने यंग इटली नामक संगठन की स्थापना की।

जिसका उद्देश्य युवाओं में राष्ट्र प्रेम और स्वतंत्रता की भावना जगाना चाहते थे।उनका विश्वास था, कि राष्ट्र ईश्वर की दें हैं।और नागरिकों का कर्त्तव्य है कि वे देश की सेवा करे।उनके विचारों ने इटली के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाईं।

काउंट कैमिलो दे कावूर

काउंट कैमिलो दे कावूर इटली के एक बड़े नेता और कुशल राजनेता थे वे सारदेनियां पीडमोंट राज्य के प्रधानमंत्री थे। कावूर बहुत समझदार थे।और लड़ाई से ज्यादा चालाकी,समझौते और राजनीति से काम लेना चाहते थे।

उनका सपना था कि इटली के सभी छोटे छोटे राज्यों को मिलाकर एक मजबूत और एकजुट देश बनाया जाए। उन्होने फ्रांस जैसे ताकतवर देशों से दोस्ती की और ऑस्ट्रिया को कमजोर किया कावूर ने रेल, उद्योग और खेती को बढ़ावा दिया।

जिससे उनका राज्य मजबूत बना ।उनके प्रयासों ने इटली के एकीकरण की नींव पड़ी।

यूनानी स्वतंत्रता युद्ध

यूनानी स्वतंत्रता युद्ध यूनान के लोगों द्वारा तुर्की (ऑटोमन) साम्राज्य के खिलाफ लड़ा गया संघर्ष था यह युद्ध 1821 ईस्वी में शूरू हुआ। यूनान के लोग अपनी भाषा संस्कृति और धर्म को बचाना चाहते थे।

यूनानी कवि लेखक और आम जनता ने मिलकर आजादी की लड़ाई शुरू की। यूरोप के कई देशों ने भी यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता मिल गई।यह युद्ध यूरोप में राष्ट्रवाद कि भावना फैलाने वाला एक बड़ा उदाहरण बना।

फ्रैंकफर्ट संसद

फ्रैंकफर्ट संसद जर्मनी में 1848 ईस्वी की क्रांति के समय बनी एक महत्वपूर्ण संसद थी। इसमें जर्मनी के अलग-अलग राज्यों से चुने गए प्रतिनिधि शामिल हुऐ। इसका मुख्य उद्देश्य पूरे जर्मनी को मिलाकर एक एकीकृत और लोकतांत्रिक राज्य बनाना था।

यह संसद फ्रैंकफर्ट शहर के सेंट पॉल चर्च में बैठी। सांसद ने संविधान बनाने की कोशिश की । और राजा को सत्ता देने का प्रस्ताव रखा,लेकिन राजा ने इसे ठुकरा दिया।जनता और सेना का समर्थन न मिलने के कारण फ्रैंकफर्ट,संसद असफल हो गई।पर इसने जर्मनी में मजबूत नींव रखी।

राष्ट्रवादी संघर्षो में महिलाओं की भूमका

राष्ट्रवादी संघर्षों में महिलाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है। महिलाओं ने केवल घर तक सीमित न रहकर आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की, गुप्त संदेश पहुंचाए, झंडे बनाए और राष्ट्रगीत गए। कई महिलाओं ने घायल स्वतंत्रता सेनानियों की सेवा की,और विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

फ्रांस जर्मनी और इटली जैसे देशों में महिलाओ ने राष्ट्रवाद की भावना फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई। हालांकि उन्हें वोट देने जैसे राजनीतिक अधिकार नहीं मिले। फिर भी उनके त्याग साहस और योगदान ने राष्ट्रवादी आंदोलनो को मजबूती दी।और आजादी की राह आसान कर दिया।

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