नमस्कार साथियों आज हम इस चैप्टर में अपवाह क्या होता है इसकी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे इस ब्लॉग से। मैं इस चैप्टर को बहुत ही आसान भाषा में समझाया है।…..

दोस्तो आपके दिमाग में एक बात तो जरूर आ रही होगी, कि जो बारिश होती है।तो वह पानी कंहा जाता होगा। आप बस यही सोचते होगे कि बारिश का पानी बिखर कर जमीन के अंदर चला जाता है या तो बहकर नदी या तालाब में चला जाता है।
दोस्तो यह यही तक सीमित नहीं है, यह पानी छोटी – छोटी धाराओं में विभाजित होता है। फिर यही धाराएं मिलकर नाला बनाती है। नाले मिलकर नदियों का निर्माण करती है। और अंत में सारा पानी ले जाके किसी झील या समुद्र में मिला देती है। बस यही सारा सिस्टम अपवाह तंत्र कहलाता है।

जल विभाजक क्या होता है?
आइए हम जल विभाजक को आसान एवं सरल भाषा में समझते है। सोचिये जरा एक पहाड़ से निकला हुआ जल कभी गंगा नदी में कभी सिंधु नहीं में जाता है। आखिर ऐसा होता क्यों है। आइए समझते है। देखिए ऐसा क्यों होता है इसका जवाब है जल विभाजक । पर्वतों की ऊंची चोटिया एक तरह का दीवार का काम करती है। इस दीवार के एक तरफ का पानी एक नदी तंत्र में जाता है और दूसरे तरफ का पानी दूसरे नदी तंत्र में जाता है।

भारत का अपवाह तंत्र
भारत के अपवाह तंत्र को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है। इनमें बहने वाली नदियों का स्वरूप, बहाव,उत्पति सब कुछ अलग है।
1. हिमालयी अपवाह तंत्र
2. प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र

हिमालयी अपवाह तंत्र
हिमालय से निकलने वाली नदियां बारहमासी होती है। इनमें वर्ष भर पानी पाया जाता है। गर्मी में भी ये नदियों का पानी नहीं सुखता है।क्योंकि ग्लेशियर गर्मी में पिघलते रहते है। इसलिए इसमें वर्षभर इन नदियों में पानी का बहाव बना रहता है। आइए हम हिमालय से निकलने पानी नदियों के बारे में जानते है।
सिंधु नदी तंत्र
सिंधु नदी का उद्गम तिब्बत में मानसरोवर झील के पास से होता है। यहां से यह नदी निकलकर लद्दाख से होते हुए भारत में प्रवेश करती है। लद्दाख में यह बहुत ही खूबसूरत गार्ज का निर्माण करती है सिंधु नदी की सहायक नदियों में झेलम, चिनाब ,रावी ,व्यास और सतलज को शामिल किया जाता है।ये सभी सहायक नदियों का मिलन बिंदु पाकिस्तान में मिठानकोट के पास ये सारी नदियां मिलकर एक हो जाती है।

गंगा नदी तंत्र
गंगोत्री ग्लेशियर से निकलने वाली भागीरथी और बद्रीनाथ से निकलने वाली अलकनंदा देवप्रयाग में मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती है। अलकनंदा तथा भागीरथी की संयुक्त धारा को ही गंगा कहा जाता है। गंगा का मैदान भारत का सबसे उपजाऊ क्षेत्र है।
गंगा की प्रमुख सहायक नदियां
- यमुना
- घांघरा
- गंडक
- कोसी

ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र
ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत में मानसरोवर से निकलती है।तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी को त्सांगपो कहा जाता है।ये हिमालय के उत्तर में बहती हुए पूर्व की तरफ जाती है। फ़िर यह अरूणाचल प्रदेश में हिमालय को काटकर भारत में प्रवेश करती है। असम में ये नदी बहुत चौड़ी हो जाती है।
भारतीय प्रायद्वीपीय नदियां
भारत की प्रायद्वीपीय नदियां हिमालय की नदियों से बिल्कुल अलग है।इनका पानी का एकमात्र स्रोत मानसून की बारिश है।इन नदियों में जब बारिश होती है। तब नदियां उफान में होती है, लेकिन जब बारिश नहीं होती तो इन नदियों में सुख पड़ जाता है।
नोट: प्रायद्वीपीय नदियां पठारी इलाकों में बहती है। इसलिए इनमें शानदार जलप्रपात बनते है। जो बिजली बनाने के काम आती है।
जोग जलप्रपात /दूधसागर जलप्रपात :
कर्नाटक का जोग जलप्रपात शरावती नदी पर स्थित है,जबकि गोवा का दूधसागर जलप्रपात मांडवी नदी में स्थित है। यह प्रायद्वीपीय नदियों द्वारा बनाए गये जलप्रपात है।

भारत की प्रमुख प्रायद्वीपीय नदियां
पश्चिम की ओर बहने वाली प्रमुख नदी : नर्मदा, तापी ये दोनों नदियां भ्रंश में बहने वाली है,यह अपना मुहाना अरब सागर में बनती है।
पूर्व की और बहने वाली प्रमुख नदी: महानदी,गोदावरी, कृष्णा,कावेरी यह प्रायद्वीपीय नदियां अपना मुहाना बंगाली खड़ी में बनाती है।

नदियां क्यों जरूरी है?
नदियां हमारे जीवन में बहुत सारा परिवर्तन लाती है जैसे हम खेती के लिए,पेयजल के लिए, बिज़ली के निर्माण के के लिए,परिवहन के लिए इत्यादि।सदियों से हम नदियों का पानी इस्तेमाल करते आ रहे है । नदियों का हमारी जीवन में बहुत बड़ा महत्व है।
गंगा,यमुना, सरस्वती यह नदियां भारतीय सभ्यता की नींव है। इन्हे समझना यानी भारत को समझना हैं ।इन नदियों के मिट्टी बहुत उपजाऊ है।इस लिए इन क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक पाई जाती है।
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