Class 10 Geography Chapter 1 Notes:

संसाधन एवं विकास
परिभाषा – जब मनुष्य प्रकृति तथा मानव निर्मित वस्तुओं का उपयोग अपनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए करता है तो उन्हें संसाधन कहा जाता है।
इन संसाधनों का संतुलित योजनाबद्ध और सतत् उपयोग करके समाज एवं देश की उन्नति करना विकास कहलाता है।
संसाधन एवं विकास का अर्थ है – प्राकृतिक मानव तथा मानव निर्मित संसाधनों का वैज्ञानिक योजनाबद्ध और सतत् उपयोग करना है ताकि वर्तमान तथा भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
सतत् पोषणीय विकास
सतत् पोषणीय विकास
सतत् पोषणीय विकास वह विकास है।जिसमें वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करती है, कि भविष्य की पीढ़ियों कि आवश्यकताओं और संसाधनों पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। सतत् पोषणीय विकास कहलाता है।
रियो डी जेनेरियो पृथ्वी सम्मेलन 1992
रियो डी जेनेरियो पृथ्वी सम्मेलन 1992 में विश्व के 170 से अधिक देशों ने भाग लिया था। इस सम्मेलन का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण,सतत् विकास जलवायु परिवर्तन और वन संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर एक साझा योजना बनाना है।
मुख्य बिंदु:
आयोजन – रियो डी जेनेरियो ( ब्राजील)
वर्ष – 1992
मुख्य उद्देश्य – पर्यावरण संरक्षण,प्राकृतिक संसाधनों का सुरक्षित उपयोग, जलवायु परिवर्तन पर रोक, सतत् विकास को बढ़ावा देना।
महत्वपूर्ण दस्तावेज :
- एजेंडा 21 ( पर्यावरण संरक्षण लिए के लिए कार्य योजना )
- जैव विविधता संरक्षण संधि
- जलवायु परिवर्तन रूपरेखा समझौता
एजेंडा -21 क्या है
एजेंडा 21 एक वैश्विक कार्य योजना है जिसे 1992 में रियो डी जेनेरियो पृथ्वी सम्मेलन में बनाया गया था। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण प्राकृतिक संसाधनों का सुरक्षित उपयोग और सतत् विकास को बढ़ावा देना है।ताकि वर्तमान एवं भविष्य के पीढ़ियों का जीवन सुरक्षित रहे।
एजेंडा -21 के मुख्य बिंदु:
आयोजन – 1992 (रियो पृथ्वी सम्मेलन में)
उद्देश्य – पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास के लिए देशों का मार्गदर्शन देना।
मुख्य विषय – प्रदूषण कम करना, जलवायु एवं भूमि का संरक्षण, गरीबी कम करना , संसाधनों का संतुलित उपयोग करना।
संसाधन नियोजन:
किसी क्षेत्र में उपलब्ध सभी प्राकृतिक संसाधनों की पहचान करके उनका सही तरीके से उपयोग करने, बचाकर रखने, और भविष्य के लिए सुरक्षित रखने की योजना बनाना। अर्थात संसाधनों का सही उपयोग और उनकी कमी न हो इसके लिए बनाई गई व्यवस्थित योजना को संसाधन नियोजन कहते हैं।
बोर्ड एग्जाम की दृष्टि महत्वपूर्ण बिंदु:
1.संसाधनों की पहचान करना – कहां,कौन,से और कितनी मात्रा में संसाधन है।
2. संसाधनों का सही उपयोग तय करना – किस संसाधन का उपयोग कैसे किया जाए ।
भविष्य के लिए संरक्षण करना – संसाधनों को बचाकर रखना ताकि आगे भी उपयोग हो सके ।
भारत में संसाधन नियोजन :
भारत में संसाधन नियोजन का मतलब है – देश में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों ( जैसे भूमि,जल,वन,खनिज, आदि) की पहचान करना और उनका सही उपयोग सुनिश्चित करना और उन्हें भविष्य के लिए सुरक्षित रखना । भारत एक विशाल और विविध देश है। इसलिए यहां संसाधनों का वितरण आसमान हैं।इस असमानता को दूर करने और संसाधनों का संतुलित विकास करने के लिए संसाधन नियोजन बहुत जरूरी है।
भू – संसाधन :
पृथ्वी की सतह पर मौजूद भूमि तथा उसमें मिलने वाले सभी लाभ प्राकृतिक संसाधनों को भू संसाधन कहते हैं। भूमि, खेती,भवन निर्माण, उद्योग,वन, सड़के और विभिन्न मानव गतिविधियों का आधार है। इसलिए यह सबसे महत्पूर्ण प्राकृतिक संसाधन माना जाता है।
भूमि उपयोग:
मानव द्वारा भूमि का किस तरह ,किस उद्देश्य और किस कार्य के लिए इस्तेमाल किया जाता है उसे भूमि उपयोग कहते हैं।
मृदा संसाधन का अर्थ
परिभाषा: मृदा संसाधन वे प्राकृतिक संसाधन है जिसमें उपजाऊ मिट्टी शामिल है जो कृषि पौधों की वृद्धि तथा मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मृदा संसाधन के मुख्य प्रकार :
- जलोढ मृदा ( Alluvial soil )
- काली मृदा ( black soil )
- लाल मृदा ( red Soil )
- पीली मृदा ( yellow soil )
- लेटराइट मृदा ( laterite soil )
- मरुस्थलीय मृदा ( desert soil )
- पर्वतीय मृदा ( moutain soil )
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बहुत-बहुत धन्यवाद आपका सर
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